चार देशों में प्रदर्शन, हिंसा और आगजनी; कम वेतन, महंगे मकानों और जीवन-यापन की बढ़ती लागत से नाराजगी
फ्रांस, इटली, बेल्जियम और पुर्तगाल में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन
भारत इंफो, यूरोप
यूरोप में बढ़ती महंगाई, कम वेतन और आवास संकट के खिलाफ फ्रांस, इटली, बेल्जियम और पुर्तगाल में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं। कई स्थानों पर शांतिपूर्ण मार्च हिंसक झड़पों में बदल गए, जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल करना पड़ा।
फ्रांस: गृह मंत्रालय के अनुसार, 5.5 लाख से अधिक लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। कई शहरों में दुकानों में लूटपाट, आगजनी और पुलिस के साथ झड़पें हुईं। प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू के मुताबिक, 1,200 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 150 पुलिसकर्मी घायल हुए। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया।
इटली: मिलान में महंगाई और युद्धों के विरोध में निकला मार्च हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके, दुकानों में लूटपाट की और आगजनी की। पुलिस ने पानी की बौछारों और आंसू गैस से भीड़ को तितर-बितर किया। रिपोर्टों के अनुसार, दो पुलिसकर्मी घायल हुए और करीब 50 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हिंसा की निंदा की।
बेल्जियम: राजधानी ब्रसेल्स में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन महंगाई के साथ-साथ शिक्षा से जुड़े मुद्दों और विश्वविद्यालयों की फीस को लेकर भी असंतोष की पृष्ठभूमि में हुए।
पुर्तगाल: राजधानी लिस्बन में हजारों लोगों ने बढ़ती जीवन-यापन लागत, कम वेतन और आवास संकट के खिलाफ मार्च निकाला। वर्ष 2017 के बाद से मकानों की कीमतें दोगुने से अधिक हो चुकी हैं, जबकि नए किरायानामों के किराये में भी भारी वृद्धि हुई है। सरकार के संसदीय मामलों के मंत्री कार्लोस अब्रू अमोरिम ने कहा कि सरकार सड़कों पर लगाए जा रहे दबाव के आगे नहीं झुकेगी। प्रदर्शनकारियों ने नेताओं पर आम लोगों की समस्याओं से कटे होने का आरोप लगाया।
यूरोप के अन्य देशों में भी फैल सकता है असंतोष
यूरोपीय संघ की नीतियों के विशेषज्ञ अल्बर्टो अलेमानो के अनुसार, फ्रांस इन प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र है, लेकिन असंतोष अन्य देशों में भी फैलने के संकेत हैं। उन्होंने ग्रीस, जर्मनी और ऑस्ट्रिया में भी विरोध प्रदर्शनों की संभावनाओं का उल्लेख किया। विशेषज्ञों के मुताबिक, ये प्रदर्शन किसी एक साझा आंदोलन का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन महंगाई, शिक्षा के लिए अपर्याप्त धन और युवाओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता जैसे मुद्दे कई देशों में समान हैं। आने वाले महीनों में राष्ट्रीय चुनावों की तैयारी के बीच ये मुद्दे यूरोप की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।