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मेलानिया ट्रंप की पहल से रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी शहर ओलेश्की में युद्धविराम पर सहमति, 29 अक्टूबर से होगा लागू

 

 

भारत इंफो, वॉशिंगटन

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी और अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल की है। व्हाइट हाउस के अनुसार, उनकी मध्यस्थता से रूस के कब्जे वाले यूक्रेन के दक्षिणी शहर ओलेश्की (Oleshky) में सीमित युद्धविराम पर सहमति बनी है। इसका उद्देश्य युद्ध प्रभावित क्षेत्र में मानवीय सहायता पहुंचाना और फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित निकालना है। यह युद्धविराम 29 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाला है।

महत्वपूर्ण यह है कि यह पूरे रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने वाला समझौता नहीं, बल्कि ओलेश्की शहर तक सीमित मानवीय युद्धविराम है। इसका घोषित उद्देश्य नागरिकों तक राहत पहुंचाना और उनकी सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना है।

 

मानवीय सहायता और नागरिकों की सुरक्षित निकासी पर जोर

व्हाइट हाउस के मुताबिक, मेलानिया ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के नेतृत्व के साथ बातचीत शुरू की और युद्धविराम की शर्तों, समय तथा इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया को तय करने में भूमिका निभाई। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दोनों पक्षों की असैन्य टीमें शहर में नागरिकों की जरूरतों का आकलन करेंगी। जरूरतमंद लोगों को भोजन, दवाइयां और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ सुरक्षित रास्ते से बाहर निकालने की व्यवस्था की जाएगी।

 

रूस और यूक्रेन के बीच सीमित समझौता

मेलानिया ट्रंप ने कहा है कि शहर में फंसे लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायता दी जाएगी और जो लोग वहां से निकलना चाहते हैं, उन्हें उनकी पसंद के गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। कुछ लोग रूस और कुछ यूक्रेन के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में जाना चाह सकते हैं।

कभी 24 हजार आबादी वाला शहर, अब गंभीर संकट में

ओलेश्की यूक्रेन के दक्षिणी खेरसॉन क्षेत्र में नीप्रो नदी के किनारे स्थित है। रूस ने 2022 में यूक्रेन पर व्यापक हमला शुरू होने के दौरान इस शहर पर कब्जा कर लिया था। युद्ध, बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान और 2023 में काखोवका बांध टूटने के बाद आई बाढ़ ने यहां के हालात और बिगाड़ दिए।

रिपोर्टों के अनुसार, शहर में अब लगभग 1,700 से 2,000 लोग ही बचे हैं। इनमें बड़ी संख्या बुजुर्गों की है। भोजन, दवाइयों, स्वच्छ पानी और बिजली की कमी के साथ बारूदी सुरंगों से भरी सड़कों और ड्रोन हमलों का खतरा भी बना हुआ है।

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