भारत इंफो, वॉशिंगटन
अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया है। इन चुनावों पर अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। चुनावी सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक पार्टी को सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, दोनों में अपनी स्थिति मजबूत करने के संकेत मिल रहे हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स की स्थिति विशेष रूप से मजबूत दिखाई दे रही है। वहीं सीनेट में भी कई महत्वपूर्ण राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार रिपब्लिकन प्रत्याशियों को चुनौती दे रहे हैं। टेक्सास, ओहायो, मिशिगन, मेन, आयोवा और अलास्का जैसे राज्यों की सीटों पर विशेष नजर है।
ट्रंप सरकार के कामकाज की परीक्षा
इन चुनावों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती दो वर्षों के कामकाज पर जनता की प्रतिक्रिया के रूप में भी देखा जा रहा है। महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतें, टैरिफ नीति, अर्थव्यवस्था और ईरान के साथ युद्ध जैसे मुद्दे चुनाव प्रचार में प्रमुख रहे हैं। सर्वेक्षणों में ट्रंप के कामकाज को लेकर असंतोष भी सामने आया है।
57 मिलियन से अधिक मतदाता पहले ही डाल चुके वोट
रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव दिवस से पहले ही 5.7 करोड़ से अधिक अमेरिकी मतदाता अर्ली वोटिंग के जरिए अपना मत डाल चुके थे। इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों, सीनेट की 35 सीटों और 36 राज्यों में गवर्नर पदों के लिए चुनाव हो रहा है।
क्या बदल जाएगा अमेरिकी कांग्रेस का राजनीतिक समीकरण?
वर्तमान में रिपब्लिकन पार्टी का दोनों सदनों में नियंत्रण है। डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने के लिए तीन और सीनेट में चार सीटों का शुद्ध लाभ हासिल करना होगा।यदि डेमोक्रेट्स दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने में सफल रहते हैं तो राष्ट्रपति ट्रंप के विधायी एजेंडे और प्रशासनिक फैसलों पर कांग्रेस में निगरानी तथा राजनीतिक चुनौती बढ़ सकती है।
हालांकि, मतदान के बाद आने वाले वास्तविक नतीजे ही अमेरिकी कांग्रेस की आगामी दो वर्षों की राजनीतिक दिशा तय करेंगे। कई करीबी मुकाबलों के परिणाम आने में कुछ दिन भी लग सकते हैं।