Wednesday, October 28, 2026
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विपक्ष को कुचलने पर उतरी ‘आप’ सरकार, विधानसभा में जाने से रोकने और खैहरा के निलंबन पर भड़के परगट सिंह

पंजाब के पानी पर समझौते और किसानों की जमीन कॉरपोरेट घरानों को सौंपने की साजिश के लगाए आरोप

 

बेअदबी तक हर मोर्चे पर सरकार की नाकामी उजागर होने का डर, आप सरकार की नीयत पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

 

विधायकों को विधानसभा में जाने से रोकना लोकतंत्र का अपमान, जवाब दे सीएम मानः परगट सिंह

 

भारत इंफो, चंडीगढ़

पंजाब विधानसभा में कांग्रेस विधायकों को सदन के भीतर जाने से रोकने और विपक्ष की आवाज दबाने के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी सरकार को घेरते हुए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जिस तरह संसद में विपक्षी सांसदों को निलंबित करने के बाद महत्वपूर्ण विधायी कार्यवाही की गई, उसी तरह पंजाब विधानसभा में भी विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सुखपाल सिंह खैहरा को निलंबित करने और कांग्रेस विधायकों, विशेषकर महिला विधायकों को सदन में प्रवेश से रोकने की घटनाएं सरकार की लोकतांत्रिक सोच पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

परगट सिंह ने कहा कि विपक्ष विधानसभा में जनता के मुद्दे उठाने और सरकार से जवाब मांगने के लिए चुना जाता है। लेकिन जब विपक्षी विधायकों को सदन के भीतर अपनी बात रखने से रोका जाए और बाहर आकर भी उन्हें अपनी आवाज उठाने के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर देने के बजाय सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह उनकी आवाज दबाने की कोशिश की। जबकि पंजाब विधानसभा में विपक्ष पंजाब के पानी, डैम सेफ्टी एक्ट, बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र, बेअदबी के मामलों और लैंड पूलिंग नीति के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहता था, इसलिए उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता 2027 में आप सरकार को सबक सिखाएगी।

पंजाब के पानी के मुद्दे पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए परगट सिंह ने कहा कि यमुना के पानी और पंजाब के जल अधिकारों को लेकर स्पष्ट कानूनी तथा संवैधानिक रुख अपनाने की आवश्यकता है। सरकार पांच प्रस्ताव लेकर आई है, लेकिन केवल प्रस्ताव पारित करने से पंजाब के हित सुरक्षित नहीं हो सकते।

कांग्रेस ने कहा कि राजस्थान को पानी देने के मुद्दे पर भी पहले प्रस्ताव लाए जा चुके हैं। ऐसे में सरकार को केवल राजनीतिक दिखावा करने के बजाय पंजाब के हितों की रक्षा के लिए अपनी नीति और कानूनी कार्रवाई स्पष्ट करनी चाहिए। पंजाब के पानी का मामला राज्य के भविष्य, किसानों की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

परगट सिंह ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार पंजाब से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर केवल बयानबाजी करती है, जबकि कानूनी लड़ाई में प्रभावी पैरवी करने की जरूरत है। बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 50 किलोमीटर तक बढ़ाने के फैसले को कांग्रेस ने चुनौती दी थी। लेकिन पंजाब के अधिकारों से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी क्यों नहीं की गई।

डैम सेफ्टी एक्ट के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा। परगट सिंह का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में पंजाब के अधिकारों और हितों की रक्षा करना चाहती है, तो उसे अदालतों में मजबूत कानूनी पक्ष रखना चाहिए और संबंधित मामलों में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। केवल विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

बेअदबी के मामलों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने कहा कि इन मामलों में न्याय सुनिश्चित करना पंजाब की जनता की भावनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। सरकार को बताना चाहिए कि संबंधित कानूनी कार्यवाही में प्रभावी पैरवी क्यों नहीं की गई और जिन मामलों में न्याय की उम्मीद लगाकर लोगों ने सरकार पर भरोसा किया था, उनमें अब तक ठोस परिणाम क्यों नहीं मिले।

पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग नीति पर भी कड़ा विरोध जताते हुए परगट सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की जमीन पर दबाव बनाकर उसे अपने पसंदीदा कॉरपोरेट घरानों के हितों के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। पार्टी ने कहा कि किसानों की जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी आजीविका, पहचान और पीढ़ियों की मेहनत का प्रतीक है। किसी भी सरकार को किसानों की सहमति और हितों की अनदेखी करके उनकी जमीन पर नीतियां थोपने का अधिकार नहीं है।

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