भारत इंफो : खाड़ी क्षेत्र में लगातार गहराते सुरक्षा संकट और जानमाल के नुकसान को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने अगले आदेश तक होर्मुज जलडमरूमध्य (होर्मुज स्ट्रेट) से होकर गुजरने वाले सभी जहाजों पर भारतीय नाविकों (सीफेयरर्स) की नई तैनाती पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
यह कड़ा निर्देश सभी जहाज मालिकों, वाणिज्यिक जहाज प्रबंधन कंपनियों और नाविकों की भर्ती करने वाली रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस (RPSL) कंपनियों पर तत्काल प्रभाव से लागू होगा, ताकि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सुरक्षा चेतावनियों और ISPS कोड के पालन के सख्त निर्देश
नई तैनाती पर रोक लगाने के साथ ही सरकार ने उन जहाजों और चालक दलों के लिए भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है, जो इस समय होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास के समुद्री इलाकों से गुजर रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नौवहन से जुड़ी सभी चेतावनियों और समुद्री सुरक्षा एडवायजरी पर लगातार पैनी नजर रखी जाए। इसके अलावा, किसी भी संभावित खतरे से बचने के लिए इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी (ISPS) कोड का शत-प्रतिशत पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है।
लगातार हमलों में गई कई भारतीय नाविकों की जान
सरकार द्वारा यह प्रतिबंधात्मक फैसला एक बेहद संवेदनशील समय पर लिया गया है। इसी हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास के क्षेत्र में हुए ईरानी हमलों के दौरान दो भारतीय नाविकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे टकराव के कारण इस अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समुद्री मार्ग पर मर्चेंट जहाजों पर हमलों का खतरा काफी ज्यादा बढ़ गया है। आधिकारिक रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी से लेकर अब तक इस अशांत क्षेत्र में हुए विभिन्न हमलों में कम से कम 14 भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है, जिसने समुद्री सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।