पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर बुधवार से सामूहिक अवकाश पर हैं
भारत इंफो, चंडीगढ़/जालंधर
पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और सरकार के बीच चल रहा टकराव गहरा गया है। प्रदेश के मुख्य सचिव (CS) के साथ संयुक्त तालमेल कमेटी के नेताओं की करीब सवा दो घंटे तक चली मैराथन बैठक पूरी तरह विफल रही। सरकार की तरफ से कर्मचारियों की एक भी मांग पर सहमति नहीं बनने के बाद कर्मचारी नेताओं ने हड़ताल को वीरवार को भी जारी रखने का बड़ा ऐलान कर दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर बुधवार से सामूहिक अवकाश (मास कैजुअल लीव) पर जाकर इस महा-हड़ताल की शुरुआत की थी। इस विरोध प्रदर्शन के कारण पूरे प्रदेश में सरकारी कामकाज ठप हो गया और दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा। कर्मचारियों के उग्र रुख को देखते हुए बुधवार दोपहर को सरकार की तरफ से बातचीत का न्योता भेजा गया, जिसमें मुख्य सचिव को कर्मचारी नेताओं के साथ बैठक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
सरकार के बुलावे पर विभिन्न जिलों से तालमेल कमेटी के प्रमुख पदाधिकारी चंडीगढ़ पहुंचे। सचिवालय में यह महत्वपूर्ण बैठक शाम 4:15 बजे शुरू हुई और करीब 6:30 बजे तक चलती रही। बैठक के दौरान कर्मचारी नेताओं ने अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से मुख्य सचिव के सामने रखा, लेकिन सरकार की ओर से उनकी एक भी डिमांड पर सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला।
बैठक के विफल होते ही सचिवालय परिसर के बाहर माहौल गरमा गया। रोष से भरे कर्मचारी नेताओं और उनके समर्थकों ने पंजाब सरकार और मुख्य सचिव के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक रवैए पर अपना गहरा असंतोष व्यक्त किया। इस बैठक में विशेष रूप से भाग लेने जालंधर से पहुंचे वरिष्ठ कर्मचारी नेता तेजिंदर सिंह नंगल और मनीष सैनी ने बैठक की विफलता की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों को लेकर कतई गंभीर नहीं दिख रही है। जब तक सरकार हमारी मांगों को मान नहीं लेती, तब तक यह संघर्ष पीछे नहीं हटेगा। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि बैठक बेनतीजा रहने के कारण अब वीरवार को भी प्रदेशव्यापी हड़ताल पूरी तरह जारी रहेगी और सभी विभागों के कर्मचारी सामूहिक छुट्टी पर रहकर अपना विरोध प्रदर्शन और तेज करेंगे।
कर्मचारियों की इस हड़ताल के जारी रहने से आम जनता की परेशानियां और बढ़ने के आसार हैं, क्योंकि राजस्व, तहसील, सेवा केंद्रों और अन्य सार्वजनिक सेवा विभागों में कामकाज पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है।
यह हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें:
सांझा तालमेल कमेटी के नेताओं के अनुसार, वे लंबे समय से अपनी वित्तीय और सेवा-संबंधी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, जिन्हें सरकार लगातार नजरअंदाज कर रही है:
• महंगाई भत्ते (DA) का बकाया: कर्मचारी लंबे समय से रोके गए 18 प्रतिशत महंगाई भत्ते (DA) के बकाए (Arrears) को तुरंत जारी करने की मांग कर रहे हैं।
• कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना: विभिन्न सरकारी विभागों, पंजाब रोडवेज, PUNBUS और PRTC में पिछले 10 से 20 वर्षों से कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से नियमित (पक्का) किया जाए।
• वेतन विसंगतियां दूर करना: पे-कमीशन की सिफारिशों के बाद से कर्मचारियों की लंबित वेतन विसंगतियों को दूर कर सेवा लाभ दिए जाएं।
• दंडात्मक कार्रवाई वापस लेना: आंदोलन के दौरान जिन कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया है या जिनके खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं, उन्हें तुरंत बहाल कर मुकदमे वापस लिए जाएं।