कांग्रेस को अगले 30 साल तक सत्ता से दूर रहने की भविष्यवाणी, केजरीवाल को चेताया—पंजाब से उखाड़ फेंकी जाएगी AAP सरकार
भारत इंफो, नई दिल्ली
पंजाब की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बड़े सियासी गठबंधन के संकेत मिलने लगे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज संकेत दिया कि पंजाब में इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनने जा रही है। उनके इस बयान को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) सहित अकाली दल के विभिन्न धड़ों के बीच संभावित गठबंधन की औपचारिक घोषणा से जोड़कर देखा जा रहा है। गठबंधन का आधिकारिक ऐलान जल्द होने की संभावना जताई जा रही है।
दिल्ली में विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के दौरान अमित शाह ने कहा, “पंजाब में इस बार NDA की सरकार बनने जा रही है।” उनके इस बयान को पंजाब में भाजपा और अकाली दल के बीच चुनावी तालमेल की दिशा में अहम राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। हालांकि, गठबंधन की औपचारिक घोषणा और सीटों के बंटवारे को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
पंजाब में बदल सकते हैं सियासी समीकरण
अमित शाह के बयान के बाद पंजाब में भाजपा और अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ने की संभावना है। यदि दोनों दलों और अकाली दल के अन्य धड़ों के बीच गठबंधन औपचारिक रूप लेता है, तो राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों की लड़ाई नए समीकरणों के साथ सामने आ सकती है। इससे सत्तारूढ़ AAP और कांग्रेस के सामने भी नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है। फिलहाल सबकी नजरें गठबंधन की औपचारिक घोषणा, संभावित सहयोगी दलों और सीटों के बंटवारे पर टिकी हैं।
पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ लंबे समय से आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन के समर्थक रहे हैं। ऐसे में शाह के बयान ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों और संभावित चुनावी रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
कांग्रेस और AAP पर भी साधा निशाना
अमित शाह ने अपने संबोधन में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस की राजनीति को नकारात्मक बताते हुए भविष्यवाणी की कि पार्टी अगले 30 वर्षों तक सत्ता से बाहर रहेगी। वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को चेतावनी देते हुए शाह ने कहा कि पंजाब के मतदाता AAP सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकेंगे। उनके इस बयान को आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा की आक्रामक राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।