भारत इंफो, मुंबई
महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ के आदेश के बाद तख्त श्री हजूर साहिब बोर्ड को बहाल कर दिया है। इसके साथ ही 2022 में बोर्ड भंग किए जाने के बाद से चल रहा सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक का कार्यकाल समाप्त हो गया है।
बोर्ड के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मिन्हास का निधन हो चुका है, जबकि आठ अन्य सदस्यों के दोबारा कार्यभार संभालने की संभावना है। इनमें उपाध्यक्ष गुरिंदर सिंह बावा, सचिव रविंदर सिंह भुंगई, एसजीपीसी के पूर्व अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल, एसजीपीसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क, परमजोत सिंह चहल, गुरमीत सिंह महाजन, हरपाल सिंह भाटिया और मनप्रीत सिंह कुंजिवाले शामिल हैं। बोर्ड की बहाली को तख्त श्री हजूर साहिब के प्रशासनिक प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब बोर्ड को आधिकारिक तौर पर बहाल कर दिया है, जिससे पिछले चार साल से अधिक समय से चल रहा सरकारी प्रशासक का शासन समाप्त हो गया है। बाम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ द्वारा दी गई अवमानना की चेतावनी और सख्त समयसीमा के बाद, राज्य के राजस्व और वन विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर इसे महाराष्ट्र सरकार के राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित किया। इस नए आदेश के साथ ही 29 जून 2022 के उस पुराने फैसले को रद्द कर दिया गया है, जिसके तहत नांदेड़ सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1956 की धारा 53 का उपयोग करके निर्वाचित बोर्ड को भंग कर दिया गया था। 8 मार्च 2019 को गठित मूल नौ सदस्यीय बोर्ड को उसके पद पर वापस बहाल कर दिया गया है। हालांकि, बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मिन्हास का निधन हो चुका है, इसलिए उपाध्यक्ष गुरिंदर सिंह बावा और सचिव रविंदर सिंह बुंगई सहित बाकी बचे सदस्य अब प्रशासनिक नियंत्रण संभालेंगे।