चीन सीमा के बेहद करीब भारत की बड़ी सामरिक उपलब्धि
दुनिया में पहली बार 13,629 फीट की ऊंचाई पर उतरा विशाल IL-76MD विमान
भारत इंफो, नई दिल्ली/लेह
भारतीय वायुसेना (IAF) ने सैन्य विमानन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। वायुसेना के भारी-भरकम रणनीतिक परिवहन विमान IL-76MD ने पूर्वी लद्दाख के न्योमा एयरफील्ड पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की है। यह विमान 13,629 फीट की ऊंचाई पर उतरा, जो इस विमान के लिए दुनिया में अब तक की सबसे अधिक ऊंचाई पर लैंडिंग का रिकॉर्ड है।
भारतीय वायुसेना ने शनिवार को इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह विमान की क्षमता के साथ-साथ उसके चालक दल की असाधारण दक्षता, सटीकता और पेशेवर कौशल का शानदार प्रदर्शन है। वायुसेना ने इसे भारत की रणनीतिक एयरलिफ्ट क्षमता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है।
चीन सीमा के करीब है न्योमा एयरबेस
पूर्वी लद्दाख के न्योमा में स्थित यह एयरबेस वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) यानी चीन सीमा से लगभग 25 किलोमीटर दूर है। करीब 13,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस एयरबेस को सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत ने वर्ष 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन सैन्य तनाव के बाद इस क्षेत्र में सैन्य ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया था। बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) ने यहां लगभग 2.7 किलोमीटर लंबा पक्का रनवे तैयार किया है। नवंबर 2025 में इस एयरबेस का औपचारिक उद्घाटन C-130J विमान की लैंडिंग के साथ हुआ था।
बेहद चुनौतीपूर्ण है इतनी ऊंचाई पर लैंडिंग
विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी अधिक ऊंचाई पर हवा का घनत्व काफी कम हो जाता है। इसका असर विमान के इंजन की क्षमता और पंखों से मिलने वाले लिफ्ट पर पड़ता है। ऐसे वातावरण में भारी विमान को सुरक्षित उतारना और उड़ान भरना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। रूसी मूल का IL-76MD चार इंजन वाला भारी परिवहन विमान है, जिसे भारतीय वायुसेना में ‘गजराज’ के नाम से भी जाना जाता है। यह लगभग 40 से 45 टन तक का सैन्य साजो-सामान, वाहन और अन्य आवश्यक सामग्री ले जाने में सक्षम है।
भारत की सैन्य ताकत को मिलेगी मजबूती
न्योमा में IL-76MD की सफल लैंडिंग से पूर्वी लद्दाख में सैनिकों, भारी सैन्य उपकरणों और जरूरी रसद की आवाजाही के लिए भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ेगी। चीन सीमा के नजदीक इस तरह के भारी परिवहन विमान का संचालन भारत की सैन्य तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल भारतीय वायुसेना के तकनीकी कौशल को दर्शाती है, बल्कि दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में भारत की बढ़ती सैन्य और रणनीतिक क्षमताओं का भी प्रमाण है। भारतीय वायुसेना की यह उपलब्धि दुनिया के सैन्य विमानन इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है।