कहा- कई संगठनों और राजनीतिक दलों में कर चुके हैं घुसपैठ, संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ लोगों को भड़काने का कर रहे काम
भारत इंफो, जगदलपुर (छत्तीसगढ़)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दिवाली मनाई। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश के जंगलों से हथियारबंद नक्सलियों का सफाया हो चुका है, लेकिन नक्सलवाद का खतरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘दिमागी नक्सल’ अब भी कई संगठनों और राजनीतिक दलों में घुसपैठ कर चुके हैं तथा लोगों को देश के संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ भड़काने का काम कर रहे हैं।
बस्तर जिले के करनपुर स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) कैंप में जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे तत्वों की पहचान करना और उन्हें परास्त करना जरूरी है, ताकि देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
मोदी ने कहा कि जंगलों में सक्रिय हथियारबंद नक्सलियों को समाप्त करना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन वैचारिक स्तर पर नक्सलवाद को बढ़ावा देने वाले लोगों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व विभिन्न संस्थाओं और राजनीतिक दलों में भी पहुंच चुके हैं।
सुरक्षा बलों को खुली छूट देने का किया दावा
प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने सुरक्षा बलों को कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता दी। उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उस समय सुरक्षा बलों के हाथ बांधकर रखे गए थे और नक्सली हमलों के बावजूद उन्हें प्रभावी जवाब देने की पर्याप्त आजादी नहीं थी।
उन्होंने दावा किया कि सरकार ने नक्सलियों और अलगाववादी संगठनों के वित्तीय नेटवर्क को भी कमजोर किया है। नकली करेंसी के नेटवर्क को ध्वस्त करने और हथियारों तथा अन्य संसाधनों की आपूर्ति बाधित करने से नक्सली संगठनों को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
47 साल में पहली बार CRPF के किसी जवान की ड्यूटी के दौरान मौत नहीं
मोदी ने अपने संबोधन में सुरक्षा बलों की उपलब्धि का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष में ड्यूटी के दौरान CRPF के किसी भी जवान की जान नहीं गई। उनके अनुसार, पिछले 47 वर्षों में यह पहली बार हुआ है।
प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सुरक्षा बलों के साहस, समर्पण और बलिदान के कारण देश इस चुनौती से बाहर निकलने में सफल हुआ है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 को देश को नक्सलवाद से मुक्त घोषित करने का दावा किया था। सरकार के अनुसार, सुरक्षा अभियानों में कई शीर्ष माओवादी नेताओं और कैडरों के मारे जाने तथा सैकड़ों नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ विकास कार्यों को आगे बढ़ाना भी सरकार की प्राथमिकता रही है।