संगरूर की रैली कांग्रेस के लिए तीन स्तरों पर परीक्षा होगी
राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने प्रदेश संगठन की ताकत, परगट सिंह के नेतृत्व की स्वीकार्यता और पंजाब की जनता के बीच कांग्रेस की चुनावी वापसी की संभावनाओं का संदेश
आप, भाजपा और अकाली दल की नजरें भी रहेंगी रैली की कामयाबी पर
मनुपाल शर्मा, संगरूर
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले आज संगरूर में होने जा रही राहुल गांधी की ‘इंसाफ रैली’ कांग्रेस के लिए महज शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रदेश में पार्टी के भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण राजनीतिक इम्तिहान मानी जा रही है।
यह 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच पंजाब कांग्रेस का पहला बड़ा राज्यस्तरीय शक्ति प्रदर्शन है। राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी में होने वाली इस रैली के लिए कांग्रेस ने एक लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा है। पार्टी के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों के नेताओं और संभावित उम्मीदवारों को भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस रैली की सफलता और असफलता का आकलन केवल भीड़ के आंकड़ों से नहीं होगा, बल्कि इससे यह भी पता चलेगा कि कांग्रेस पंजाब में अपने संगठन को कितना सक्रिय और एकजुट कर पाई है। आम आदमी पार्टी के लिए भी यह रैली राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि संगरूर मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह जिला है। भाजपा और शिरोमणि अकाली दल भी कांग्रेस के इस शक्ति प्रदर्शन पर नजर रखेंगे।
परगट सिंह की पहली बड़ी परीक्षा
पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष परगट सिंह के लिए यह रैली प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। अध्यक्ष पद संभालने के बाद यह उनका पहला बड़ा प्रदेशस्तरीय आयोजन है। पार्टी के भीतर पहले से मौजूद गुटबाजी और वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेदों के बीच परगट के सामने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने की चुनौती भी है।
यदि रैली में कांग्रेस एक लाख की भीड़ के लक्ष्य के करीब पहुंचती है और प्रदेश नेतृत्व एकजुट दिखाई देता है तो इससे पार्टी के साथ-साथ परगट सिंह की संगठनात्मक पकड़ भी मजबूत होगी। इसके विपरीत अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन उनके नेतृत्व और चुनावी तैयारियों पर सवाल खड़े कर सकता है।
रैली से क्या निकलेगा चुनावी संदेश?
कांग्रेस इस मंच से नशा, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याओं और पंजाब के अधिकारों जैसे मुद्दों पर भगवंत मान सरकार को घेरने की तैयारी में है। लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या राहुल गांधी का संदेश पंजाब के मतदाताओं तक पहुंचाने के लिए पार्टी जमीनी स्तर पर कोई ठोस रणनीति पेश कर पाती है।
2027 के चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी द्वारा उम्मीदवारों की पहली सूची जारी किए जाने के बाद कांग्रेस पर भी अपनी चुनावी तैयारी तेज करने का दबाव है।