बैठक विफल होने के बाद सरकार ने मांगी गैर-हाजिर कर्मचारियों की सूची
भारत इंफो, चंडीगढ़
पंजाब सरकार के सामूहिक अवकाश (मास लीव) पर गए कर्मचारियों और सरकार के बीच तनातनी चरम पर पहुंच गई है। बुधवार को प्रदेश के मुख्य सचिव के साथ लगभग सवा दो घंटे तक चली बैठक विफल होने के बाद सरकार ने पत्र जारी कर 21 अक्टूबर को बिना पूर्व मंजूरी के ड्यूटी से नदारद रहने वाले कर्मचारियों की सूची मांगी है, जिससे कर्मचारी रोष में आ गए हैं और उन्होंने वीरवार को भी हड़ताल यथावत जारी रखने की घोषणा कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और उपायुक्तों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने वाले सभी कर्मचारियों की सूची तैयार कर तुरंत विभाग को ईमेल (gadestt5@gmail.com) के जरिए भेजी जाए। सरकार के इस कड़े रुख से साफ है कि वह यह बताना चाहती है की हड़ताल पर गए कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है।
दूसरी ओर, इस गतिरोध को सुलझाने के लिए बुधवार प्रमुख सचिव और कर्मचारी नेताओं के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक पूरी तरह विफल रही। बैठक में मांगों पर कोई सहमति न बन पाने के कारण कर्मचारी नेताओं में भारी रोष देखा गया। बैठक के बेनतीजा खत्म होते ही कर्मचारियों ने सरकारी परिसरों में इकट्ठा होकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कर्मचारी संगठनों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि सरकार उनकी जायज मांगों को पूरा करने के बजाय सूची मांगकर उन पर दबाव बनाने की राजनीति कर रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके विरोध में कर्मचारी नेताओं ने एलान किया है कि उनका आंदोलन थमेगा नहीं और वीरवार को भी सामूहिक हड़ताल व कार्य बहिष्कार पूरी तरह जारी रहेगा। सरकार की इस सख्ती और कर्मचारियों के अड़ियल रुख के बाद अब राज्य में प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप होने की आशंका और गहरी हो गई है।डीसी ऑफिस कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष तेजिंदर सिंह नंगल की तरफ से तमाम कर्मचारियों को 10 बजे से धरने पर बैठने के लिए संदेश भिजवा दिया गया है।
वहीं दूसरी तरफ यह भी फैसला लिया गया है कि सरकार की तरफ से मांगी गई कोई भी सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। इस संबंध में यह भी कहा गया है कि अगर बावजूद सूचना भिजवाई जाती है तो फिर संघर्ष किया जाएगा।