भारत इंफो, जालंधर : पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष परगट सिंह दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ लगातार बैठकों के बाद वीरवार को पंजाब लौटेंगे। 2 अक्टूबर को पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकातों का सिलसिला जारी रखने वाले परगट सिंह पंजाब में अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत भी धार्मिक आस्था और गुरु चरणों में नतमस्तक होकर करेंगे।
परगट सिंह वीरवार को नई दिल्ली से सीधे श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अमृतसर पहुंचेंगे। इसके बाद उनका कार्यक्रम गुरु नगरी में विभिन्न धार्मिक स्थलों पर माथा टेकने का है। वे सबसे पहले श्री दरबार साहिब में नतमस्तक होकर पंजाब की खुशहाली और प्रदेश की जनता के लिए अरदास करेंगे। इसके बाद श्री गुरु दुर्गियाना मंदिर और श्री राम तीर्थ में भी माथा टेकेंगे।
धार्मिक स्थलों पर शीश नवाने के बाद परगट सिंह जालंधर स्थित डेरा बल्लां पहुंचकर संत समाज का आशीर्वाद लेंगे। उनके इस धार्मिक दौरे को पंजाब कांग्रेस की नई शुरुआत के तौर पर भी देखा जा रहा है। अध्यक्ष पद संभालने के बाद परगट सिंह का यह पंजाब में पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम होगा, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी साफ दिखाई देगा।
दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से बैठकों का दौर
2 अक्टूबर को पंजाब कांग्रेस की कमान संभालने के बाद परगट सिंह लगातार नई दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ मुलाकातें कर रहे हैं। संगठन को मजबूत करने, पंजाब कांग्रेस को नई दिशा देने और आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया है।
परगट सिंह ने राहुल गांधी, सचिन पायलट, कांग्रेस महासचिव संगठन के.सी. वेणुगोपाल, मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय मनमोहन सिंह की धर्मपत्नी गुरशरण कौर, अंबिका सोनी समेत कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेताओं तथा पार्टी के विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों से मुलाकात कर संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर चर्चा की है। दिल्ली प्रवास के दौरान उनकी कई महत्वपूर्ण मुलाकातों को पंजाब कांग्रेस की आगामी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
अब दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से बैठकों के बाद पंजाब वापसी के लिए परगट सिंह ने जिस तरह गुरु नगरी से अपनी यात्रा शुरू करने का कार्यक्रम बनाया है, उससे यह संकेत भी मिल रहा है कि वे अपनी नई जिम्मेदारी की शुरुआत आस्था, संगठन और पंजाब के हित को केंद्र में रखकर करना चाहते हैं।
दरबार साहिब से डेरा बल्लां तक उनका यह सफर राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में पंजाब में उनकी सक्रियता का पहला चरण किस तरह आकार लेता है, इस पर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ पंजाब की सियासत की भी नजर रहेगी।