-पंजाब CM के OSD पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर CBI की FIR, 8 ठिकानों पर छापेमारी
भारत इंफो, चंडीगढ़/जालंधर
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के बाद CBI ने पंजाब के CM के कैंप ऑफिस और OSD राजबीर घुमन के घर पर छापेमारी की। कोर्ट ने ट्रांसफर के बदले पैसे लेने और भ्रष्टाचार के आरोपों की केंद्रीय जांच का आदेश दिया था।
पंजाब के मुख्यमंत्री के OSD और उनके कथित सहयोगियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों तथा प्रवर्तन निदेशालय (ED) से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद की गई है।
CBI के अनुसार, आरोप है कि मुख्यमंत्री के OSD और उनके सहयोगियों द्वारा आर्थिक लाभ के बदले अधिकारियों की पोस्टिंग और तबादलों, जिनमें IAS और IPS अधिकारी भी शामिल हैं, विभागीय कार्रवाई, नीतियां तैयार करने, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर की शर्तों, लाइसेंसिंग मामलों, लैंड यूज कन्वर्जन, संपत्ति विवादों तथा राजस्व और भूमि से जुड़े मामलों को प्रभावित और कथित रूप से नियंत्रित किया जाता था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह भी आरोप है कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने सरकार द्वारा आदेशों और नीतियों को जारी किए जाने से पहले उनके ड्राफ्ट कथित तौर पर निजी व्यक्तियों को उपलब्ध कराए।
CBI ने इस मामले में कुल छह नामजद आरोपियों के अलावा अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया है। इनमें पंजाब के मुख्यमंत्री के OSD राजबीर घुम्मण, नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आर.एस. नागरा के नाम शामिल हैं।
पंजाब के कई जिलों में एक साथ छापेमारी
FIR दर्ज करने के बाद CBI ने मामले से जुड़े आरोपियों के परिसरों पर व्यापक और समन्वित तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी ने चंडीगढ़, मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर में कुल 8 स्थानों पर तलाशी ली।
CBI के अनुसार, तलाशी के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण दस्तावेज समेत कई ऐसी सामग्री बरामद और जब्त की गई है, जिनकी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों को कथित रिश्वतखोरी तथा अन्य अनियमितताओं से जुड़े संभावित सबूतों के तौर पर खंगाल रही है।
CBI ने कहा—जांच जारी
केंद्रीय जांच ब्यूरो ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है। एजेंसी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और रिश्वतखोरी में संलिप्त लोगों को कानून के दायरे में लाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
हालांकि, FIR में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध होना न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।