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‘एक राज्य, एक टीम’ व्यवस्था खत्म करने की मांग, इकबाल सिंह संधू ने PM को भेजा प्रस्ताव

भारत इंफो : भारतीय खेल प्रशासन में संरचनात्मक बदलाव की मांग को लेकर सुरजीत हॉकी सोसायटी, जालंधर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं PCS (सेवानिवृत्त) इकबाल सिंह संधू ने प्रधानमंत्री को एक कार्यकारी प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में बड़े राज्यों में Constituent Sports Associations (CSAs) गठित करने और लंबे समय से चली आ रही ‘एक राज्य, एक टीम’ व्यवस्था में बदलाव की मांग की गई है।

जनसंख्या के आधार पर मिले खेलों में प्रतिनिधित्व

इकबाल सिंह संधू के अनुसार मौजूदा व्यवस्था में राज्य के भौगोलिक क्षेत्रफल या आबादी की परवाह किए बिना सामान्य तौर पर प्रत्येक राज्य को राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में एक ही टीम भेजने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि करीब 7.1 लाख आबादी वाले सिक्किम और लगभग 24.35 करोड़ आबादी वाले उत्तर प्रदेश को समान टीम कोटा मिलना खिलाड़ियों के लिए समान अवसर की व्यवस्था नहीं है।

उन्होंने तर्क दिया कि बड़े राज्यों में खिलाड़ियों की संख्या और राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध स्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा कई गुना बढ़ जाती है। इसका सीधा असर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के अवसरों पर पड़ता है और कई खिलाड़ी शुरुआती स्तर पर ही राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने से वंचित रह जाते हैं।

BCCI और पुराने हॉकी मॉडल का दिया उदाहरण

प्रस्ताव में खेल प्रशासन में मौजूद सफल मॉडलों का भी उल्लेख किया गया है। इकबाल सिंह संधू ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) का उदाहरण देते हुए कहा कि एक ही राज्य के भीतर अलग-अलग क्षेत्रीय क्रिकेट संघों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व दिया जाता है। महाराष्ट्र में मुंबई, महाराष्ट्र और विदर्भ, जबकि गुजरात में गुजरात, सौराष्ट्र और बड़ौदा जैसी इकाइयां इसका उदाहरण हैं।

उन्होंने भारतीय हॉकी के पुराने मॉडल का भी हवाला दिया, जिसमें हैदराबाद, मध्य भारत, PEPSU, भोपाल, विदर्भ और बॉम्बे जैसी क्षेत्रीय इकाइयां राष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र रूप से खेलती रही हैं। उनके मुताबिक इस व्यवस्था ने जमीनी स्तर पर प्रतिस्पर्धा और प्रतिभा विकास को बढ़ावा दिया था।

यूपी में 5 और बिहार-महाराष्ट्र में 3-3 CSA का प्रस्ताव

प्रस्ताव में करीब 2 करोड़ की आबादी पर एक CSA के आधार पर प्रतिनिधित्व तय करने की सिफारिश की गई है। इसके तहत उत्तर प्रदेश में पश्चिमांचल, मध्यांचल, पूर्वांचल, बुंदेलखंड तथा प्रयागराज-विंध्य के आधार पर 5 टीमों का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं बिहार और महाराष्ट्र के लिए 3-3 टीमों का सुझाव दिया गया है।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, तेलंगाना, केरल, असम, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में भी क्षेत्रीय आधार पर दो-दो CSA बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। पंजाब के लिए माझा-दोआबा और मालवा, जबकि हरियाणा के लिए NCR-अंबाला तथा हिसार-रोहतक क्षेत्र का सुझाव दिया गया है।

खिलाड़ियों के प्रमाण-पत्र और रोजगार अधिकारों पर जोर

इकबाल सिंह संधू ने प्रस्ताव में खिलाड़ियों के खेल और रोजगार संबंधी हितों की सुरक्षा के लिए भी प्रावधान सुझाए हैं। उनके मुताबिक CSAs को Societies Registration Act के तहत पंजीकृत करने, National Sports Development Code का पालन कराने तथा संबंधित National Sports Federations और Indian Olympic Association से मान्यता एवं संबद्धता देने की व्यवस्था होनी चाहिए।

प्रस्ताव में CSA की ओर से जारी सहभागिता और मेरिट प्रमाण-पत्रों को पारंपरिक राज्य स्तरीय प्रमाण-पत्रों के समान दर्जा देने की मांग की गई है। इससे खिलाड़ियों को सशस्त्र बलों, भारतीय रेलवे, CAPFs, राज्य पुलिस सेवाओं, PSUs और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में खेल कोटे के तहत नियुक्ति के अवसर मिल सकेंगे।

‘हजारों राष्ट्रीय स्तर के अवसर खुल सकते हैं’

इकबाल सिंह संधू ने कहा कि यह सुधार देश के बड़े राज्यों में हजारों खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय स्तर के अवसर खोल सकता है। उनके अनुसार इससे ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों की आजीविका और भविष्य को सुरक्षित करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के लिए भारत की प्रतिभा खोज और विकास की प्रक्रिया को भी व्यापक बनाया जा सकता है।

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