भारत इंफो : पंजाब राज्य जीएसटी विभाग ने जालंधर में एक बड़े टैक्स फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है। विभाग ने 55.35 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग और 8.35 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले में एम/एस रामसन्स कॉरपोरेशन (GSTIN: 03BFDPB3574F1ZZ) के मालिक भूपिंदर शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। यह सख्त कार्रवाई पंजाब जीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 69 के तहत 9 जुलाई 2026 को की गई। इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व डिप्टी कमिश्नर स्टेट टैक्स (डीसीएसटी) जालंधर, पवनजीत सिंह ने किया, जिनके साथ असिस्टेंट कमिश्नर डॉ. अनुराग भारती और अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
फर्जीवाड़े का तरीका और सरकारी खजाने को नुकसान
विभागीय जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि रामसन्स कॉरपोरेशन बिना किसी वास्तविक माल की सप्लाई किए ही लगातार जाली चालान (इनवॉइस) जारी कर रही थी। इन फर्जी बिलों के आधार पर न केवल खुद फर्जी आईटीसी का लाभ उठाया गया, बल्कि अन्य फर्मों को भी इसका गैरकानूनी फायदा पहुंचाया गया। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस फर्जी आईटीसी का इस्तेमाल कुछ मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों द्वारा निर्यात पर चुकाए गए आईजीएसटी (IGST) का रिफंड लेने के लिए किया गया। इस पूरी प्रक्रिया से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का भारी नुकसान पहुंचा है।
गैर-जमानती अपराध और आगे की जांच
जीएसटी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, भूपिंदर शर्मा द्वारा किया गया यह अपराध पंजाब जीएसटी अधिनियम के तहत संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-bailable) श्रेणी में आता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल मामले की गहन जांच चल रही है। उन सभी व्यक्तियों और कंपनियों की पहचान की जा रही है जिन्होंने इस फर्जी आईटीसी रैकेट से लाभ उठाया है, ताकि टैक्स चोरी के इस पूरे नेटवर्क को खत्म किया जा सके। विभाग ने चेतावनी दी है कि टैक्स चोरी और फर्जी बिल जारी करने वालों के खिलाफ आगे भी ऐसी ही सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।