देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डेरा बल्लां पहुंचे थे और अब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ की शुरुआत आरक्षित विधानसभा क्षेत्र आदमपुर से की है
मनुपाल शर्मा, भारत इंफो : सीमांत राज्य पंजाब में विधानसभा चुनाव अब मात्र कुछ माह की दूरी पर ही हैं। पंजाब की राजनीति में दलित वोट बैंक खास महत्व रखता है और सतलुज एवं ब्यास नदियों के मध्य स्थित दोआबा क्षेत्र दलित बहुल क्षेत्र है। प्रत्येक चुनाव में लगभग तमाम राजनीतिक पार्टियां दलित वोट बैंक को लुभाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ती हैं। इस बार खास यह है कि कुछ समय पहले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद डेरा बल्लां पहुंचे थे और अब राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मावां धीयां सत्कार योजना, जिसके तहत एक हजार एवं 1500 रुपए महिलाओं को दिए जाने हैं, कि शुरुआत आरक्षित विधानसभा क्षेत्र आदमपुर से कर डाली है।
यही वजह है कि पंजाब की सियासत एक बार फिर दोआबा क्षेत्र के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। दलित बहुल इस इलाके, खासकर आदमपुर सीट और डेरा बल्लां फेक्टर के चलते राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डेरा बल्लां पहुंचना केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा चुका है। डेरा बल्लां लंबे समय से दलित समुदाय का प्रमुख धार्मिक केंद्र रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री का यहां जाना सीधे तौर पर दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ की शुरुआत आदमपुर जैसे आरक्षित विधानसभा क्षेत्र से कर एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है। इस योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा सामाजिक कल्याण के साथ-साथ चुनावी रणनीति का भी हिस्सा मानी जा रही है।
कांग्रेस की परंपरागत पकड़ को चुनौती
2022 के विधानसभा चुनावों में इंडियन नेशनल कांग्रेस ने आदमपुर सहित दोआबा के कई क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन किया था। दलित वोट बैंक पर कांग्रेस की पारंपरिक पकड़ रही है, लेकिन अब आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी, दोनों ही इस समीकरण को बदलने की कोशिश में जुटे हैं।
बीजेपी की रणनीति: धार्मिक जुड़ाव
बीजेपी का फोकस इस बार साफ तौर पर दलित समुदाय के साथ अपने संबंध मजबूत करने पर है। डेरा बल्लां जैसे धार्मिक केंद्रों से जुड़ाव बढ़ाकर पार्टी सामाजिक स्तर पर पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
आम आदमी पार्टी की रणनीति: कल्याणकारी योजनाएं
वहीं, आम आदमी पार्टी सरकार योजनाओं के जरिए सीधा लाभ पहुंचाकर मतदाताओं को जोड़ने में लगी है। ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ जैसे कदम महिलाओं और गरीब वर्ग को साधने की दिशा में उठाए गए हैं, जिससे दलित और कमजोर वर्गों में पार्टी की पकड़ मजबूत हो सके।
पंजाब में चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आएंगे, दलित वोट बैंक को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी। चुनावी बिसात यह संकेत दे रही है कि इस बार मुकाबला केवल पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि रणनीतियों और सामाजिक समीकरणों के बीच होगा।
स्पष्ट है कि दोआबा का दलित वोट बैंक इस बार भी “किंगमेकर” की भूमिका में रहेगा, और इसी के इर्द-गिर्द नरेंद्र मोदी और भगवंत सिंह मान के बीच सियासी घमासान तेज होने वाला है।