भारत इंफो : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के मामले में अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी अनुशासन को सर्वोपरि मानती है और जो भी व्यक्ति पार्टी की नीतियों या निर्धारित दिशा के खिलाफ जाकर काम करता है, उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।
पहली बार नहीं लिया गया ऐतिहासिक फैसला
सीएम मान ने कहा कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब आम आदमी पार्टी ने इस तरह के कड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। उनके अनुसार, संगठन की मजबूती के लिए समय-समय पर नेतृत्व में बदलाव करना एक सामान्य प्रक्रिया है और सदन में नेता या उपनेता बदलते रहते हैं।
पंजाब के मुद्दों की अनदेखी कर ‘समोसे-पिज्जा’ पर बात की
मुख्यमंत्री मान ने राघव चड्ढा की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने सदन में पंजाब के हितों की प्रभावी ढंग से वकालत नहीं की। सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि जब किसानों के गंभीर मसलों पर बात होनी चाहिए थी, तब राघव चड्ढा समोसे और पिज्जा जैसे विषयों पर चर्चा कर रहे थे, जो उनके इरादों पर संदेह पैदा करता है।
राघव चड्ढा किसी ‘दूसरे स्टेशन’ से बोल रहे थे और पंजाब के बुनियादी मुद्दों को उन्होंने पूरी तरह दरकिनार कर दिया। कई बार रणनीतिक तौर पर फैसले विपक्ष के साथ मिलकर भी लेने पड़ते हैं और जो इन फैसलों का सम्मान नहीं करता, उसे अंजाम भुगतना पड़ता है।
राघव चड्ढा को छीनकर अशोक मित्तल को दी जिम्मेदारी
गौर करने वाली बात यह है कि पार्टी ने केवल राघव चड्ढा को पद से ही नहीं हटाया, बल्कि राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह आधिकारिक अनुरोध भी किया है कि उन्हें सदन में बोलने का मौका न दिया जाए। राघव चड्ढा द्वारा हाल ही में दिए गए “खामोश करवाया गया हूं” वाले बयान पर सीएम ने कहा कि उनके बयानों का जवाब खुद वही दे सकते हैं, लेकिन पार्टी के लिए जनहित और अनुशासन सबसे ऊपर है।