भारत इंफो : भारत में सोने के प्रति दीवानगी केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक विशाल आर्थिक शक्ति बन चुकी है। भारतीय व्यापारियों के संगठन ‘एसोचैम’ (Assocham) की हालिया रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय घरों और मंदिरों में कुल मिलाकर करीब 50,000 टन सोना जमा है।
इस विशाल भंडार की कीमत लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 830 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। ताज्जुब की बात यह है कि यह भंडार दुनिया के सबसे बड़े 10 सेंट्रल बैंकों के कुल स्वर्ण भंडार से भी कहीं अधिक है। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीयों की तिजोरियों में इतनी ताकत है कि वे वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा बदल सकते हैं।
देश की जीडीपी से भी बड़ा हुआ ‘सोने का पहाड़’
सोने की कीमतों में निरंतर हो रहे इजाफे ने भारतीय परिवारों की संपत्ति को एक नया आयाम दिया है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के ताजा अनुमानों के अनुसार, जनवरी 2026 तक भारतीय घरों में रखे सोने की कुल वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर गई है। यह राशि भारत की कुल जीडीपी का लगभग 125 प्रतिशत हिस्सा कवर करती है।
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर अमेरिका और चीन को छोड़ दिया जाए, तो भारतीयों के पास मौजूद सोने की वैल्यू दुनिया के लगभग हर देश की सालाना जीडीपी से कहीं ज्यादा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इस मृत पड़ी संपत्ति (Dead Asset) को बैंकिंग सिस्टम या मुख्य व्यवसायिक गतिविधियों में शामिल कर लिया जाए, तो भारतीय अर्थव्यवस्था रॉकेट की रफ्तार से बढ़ सकती है।
बैंकों पर भरोसा कम, सोने पर दांव ज्यादा
आज के डिजिटल दौर में भी भारतीयों का सबसे अटूट विश्वास ‘पीली धातु’ पर ही टिका है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि परिवारों के पास मौजूद बैंक डिपॉजिट और शेयर बाजार में निवेश किए गए कुल पैसे की तुलना में उनके पास रखे सोने की वैल्यू 175 प्रतिशत ज्यादा है। यह स्थिति दर्शाती है कि आम भारतीय नागरिक कैश या स्टॉक के मुकाबले सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानता है। रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि अगर जमीन और मकान जैसी अचल संपत्ति को छोड़ दिया जाए, तो भारतीयों की कुल ‘नॉन-प्रॉपर्टी वेल्थ’ में अकेले सोने की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
भारतीय इकोनॉमी का ‘स्लीपिंग जायंट’ बना गोल्ड
एसोचैम का मानना है कि घरों में रखा यह सोना भारतीय अर्थव्यवस्था का वह ‘सोया हुआ शेर’ है, जिसे अगर सही तरीके से चैनेलाइज किया जाए तो भारत की विकास दर कई गुना बढ़ सकती है। वर्तमान में यह विशाल संपदा केवल तिजोरियों और लॉकरों की शोभा बढ़ा रही है। अर्थशास्त्रियों का सुझाव है कि गोल्ड मोनेटाइजेशन जैसी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाकर इस 10 ट्रिलियन डॉलर की वेल्थ को देश के विकास कार्यों, बुनियादी ढांचे और व्यापारिक विस्तार में उपयोग किया जा सकता है, जो भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम साबित होगा।