पंजाब सरकार और परिवार के बीच बनी सहमति, परिवार को 2 करोड़ रुपये मुआवजा और पत्नी को सरकारी नौकरी देने का आश्वासन
भारत इंफो, मानसा
पंजाब के चर्चित परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड में पिछले 22 दिनों से चला आ रहा गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिवार ने 6 नवंबर को उनके शव का पोस्टमार्टम करवाने और अंतिम संस्कार करने पर सहमति जता दी है।
बुधवार को मानसा में पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां की मौजूदगी में परिवार, इंसाफ एक्शन कमेटी और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच कई घंटे चली बैठक के बाद यह सहमति बनी।
समझौते के अनुसार, पोस्टमार्टम पीजीआई चंडीगढ़ के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम करेगी। इसकी व्यवस्था सीबीआई की ओर से की जाएगी। मामले की जांच भी सीबीआई को सौंपने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है।
सरकार ने झोटा के परिवार को 2 करोड़ रुपये मुआवजा देने और उनकी पत्नी को योग्यता के अनुसार सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा झोटा की याद में सरकारी जमीन पर प्रतिमा स्थापित करने और मानसा में प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर का नाम उनके नाम पर रखने का भी निर्णय लिया गया है।
बैठक में सरकार ने प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने और गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को रिहा करने पर भी सहमति जताई। इंसाफ कमेटी ने मुख्यमंत्री आवास के प्रस्तावित घेराव को भी वापस ले लिया है।
इस मामले में मानसा के संबंधित एसएचओ, डीएसपी और ड्रग इंस्पेक्टर को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। सरकार ने अवैध नशा कारोबार के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का भी भरोसा दिया है।
हालांकि, इंसाफ कमेटी की ओर से मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी के इस्तीफे की मांग पर सहमति नहीं बन पाई। कमेटी के प्रतिनिधियों ने कहा कि राजनीतिक जवाबदेही का फैसला जनता चुनाव में करेगी।
गौरतलब है कि 13 अक्टूबर को मानसा में एक मेडिकल स्टोर पर हुई गोलीबारी में परविंदर सिंह झोटा की मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार ने पोस्टमार्टम से इनकार कर दिया था और न्याय की मांग को लेकर लगातार आंदोलन चल रहा था। शव 22 दिनों से मानसा सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ था।