DA-DR की देनदारी 22,818 करोड़ रुपये पहुंची
भुगतान में देरी पर 6% सालाना ब्याज देना होगा
मुख्य सचिव से 17 नवंबर तक जवाब तलब
भारत इंफो, चंडीगढ़
पंजाब सरकार पर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया भुगतान का बोझ बढ़कर 32,418 करोड़ रुपये हो गया है। पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल स्थिति रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। इसमें 1 जुलाई 2021 से 30 सितंबर 2026 तक के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) का बकाया 22,818 करोड़ रुपये बताया गया है।
मुख्य सचिव केएपी सिन्हा ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार के बराबर डीए देने पर राज्य के खजाने पर हर साल लगभग 4,712 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। वित्त वर्ष 2025-26 में कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर सरकार का वार्षिक खर्च लगभग 58,064 करोड़ रुपये रहा है।
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भुगतान लंबित
सरकार ने स्वीकार किया है कि हाईकोर्ट के 3 अगस्त 2026 के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई रोक नहीं लगाई गई है। ऐसे में कर्मचारियों और पेंशनरों को बकाया डीए/डीआर का भुगतान 6 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज सहित करने की देनदारी बरकरार है। सरकार ने अदालत को बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में 18 सितंबर को हुई बैठक में डीए 8 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला लिया गया था। इसके बाद 23 सितंबर को वित्त विभाग ने डीए की दर 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी। यह बढ़ोतरी 1 सितंबर 2026 से लागू की गई और सितंबर का वेतन व पेंशन अक्टूबर में बढ़ी हुई दर से जारी किए गए। हालांकि, इससे पुराने बकाये का भुगतान नहीं हुआ।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के 3 अगस्त के फैसले को चुनौती देते हुए 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की थी। प्रक्रियागत कमियां बताए जाने के बाद इसे 1 अक्टूबर को दोबारा दाखिल किया गया। सरकार ने भुगतान में देरी को जानबूझकर की गई अवहेलना मानने का विरोध किया है और अपनी वित्तीय स्थिति का हवाला दिया है।
इस बीच, 3 नवंबर को हाईकोर्ट ने बकाया डीए भुगतान संबंधी आदेशों का पालन नहीं होने पर मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को अवमानना नोटिस जारी किया है और सरकार से 17 नवंबर तक जवाब मांगा है। कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया भुगतान का यह मामला अब पंजाब सरकार के लिए बड़ा वित्तीय और कानूनी मुद्दा बन गया है।