भारत इंफो : आज यानी 1 नवंबर से देशभर में कई अहम नियमों में बदलाव हुआ है। इनमें कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी से लेकर टोल टैक्स और फास्टैग पास से जुड़े नए नियम शामिल हैं। इसके अलावा मोबाइल पर अनजान नंबर से आने वाली कॉल पर कॉलर का असली नाम दिखाने, म्यूचुअल फंड निवेश और जीएसटी नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों का सीधा असर आम लोगों, वाहन मालिकों, कारोबारियों और निवेशकों पर पड़ सकता है।
कॉमर्शियल गैस सिलेंडर 17 रुपए तक महंगा
तेल कंपनियों ने दिवाली से पहले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 17 रुपए तक की बढ़ोतरी कर दी है। कीमतों में इस इजाफे से होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों का खर्च बढ़ सकता है। इसका असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। रेस्टोरेंट संचालक चाय और नाश्ते के दाम बढ़ा सकते हैं, जबकि शादियों में कैटरिंग का खर्च भी बढ़ने की संभावना है।
टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर दायरे में रहने वालों को राहत
टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले निजी वाहन मालिकों के लिए राहत की खबर है। नए नियम के तहत स्थानीय वाहन मालिकों को सालभर के लिए लोकल फास्टैग पास की सुविधा मिलेगी। इसके लिए 1,500 या 3,000 रुपए की तय फीस देनी होगी। इस पास के जरिए पात्र वाहन मालिकों को बार-बार टोल टैक्स देने से राहत मिलेगी।
अनजान नंबर से कॉल आने पर दिखेगा असली नाम
अब मोबाइल पर किसी अनजान नंबर से कॉल आने पर स्क्रीन पर नंबर के साथ कॉल करने वाले का नाम भी दिखाई देगा। यह नाम सिम कार्ड लेते समय सरकारी पहचान पत्र में दर्ज जानकारी के आधार पर दिखाया जाएगा। इसके लिए मोबाइल यूजर्स को कोई थर्ड पार्टी एप डाउनलोड करने या अलग से सर्विस शुरू करने की जरूरत नहीं होगी। दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए इस व्यवस्था को लागू करना अनिवार्य किया है।
म्यूचुअल फंड निवेश के नियमों में बदलाव
1 नवंबर से म्यूचुअल फंड कंपनियों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निवेश करते समय डायरेक्ट प्लान डिफॉल्ट विकल्प के रूप में दिखाई देगा। अगर कोई निवेशक रेगुलर प्लान चुनना चाहता है, तो उसे पहले ही स्क्रीन पर अतिरिक्त खर्च की जानकारी दी जाएगी। रेगुलर प्लान में डायरेक्ट प्लान के मुकाबले 0.66% से 1.7% तक अतिरिक्त खर्च हो सकता है।
छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को भी राहत
छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए भी जीएसटी नियमों में ढील दी गई है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के नए प्रावधान के तहत छोटे विक्रेता दूसरे राज्यों में अलग से कार्यालय खोले बिना भी सामान बेच सकेंगे। वे अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के गोदाम के पते का इस्तेमाल दूसरे राज्यों में जीएसटी पंजीकरण के लिए कर सकेंगे।