भारत इंफो : जालंधर के सतनाम नगर मार्केट में स्थित ‘किंगडम कंसलटेंट’ (Kingdom Consultant) के दफ्तर के बाहर भारी संख्या में किसानों और पीड़ितों ने जमा होकर जमकर हंगामा किया। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के सहयोग से पीड़ितों ने दफ्तर के बाहर ही धरना लगा दिया है। प्रदर्शनकारी किसानों का साफ कहना है कि यदि ठगी के शिकार हुए पीड़ितों के पैसे तुरंत वापस नहीं लौटाए गए, तो वे मुख्य सड़क पर चक्का जाम करके यातायात पूरी तरह ठप कर देंगे।
सोशल मीडिया विज्ञापन देखकर आए थे, 5 लाख ऐंठने का आरोप
पीड़ित जगमेल सिंह ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि लगभग 11 महीने पहले उन्होंने अपनी बेटी का कनाडा का वीजा लगवाने के लिए इस एजेंसी से संपर्क किया था। सोशल मीडिया पर लुभावने विज्ञापन देखकर वे दफ्तर पहुंचे थे, जहां स्टाफ ने 2 महीने के भीतर वीजा दिलवाने का भरोसा दिया था। इसके एवज में 5.12 लाख रुपये तय हुए, जिसमें से 4.22 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए थे। ऑनलाइन भुगतान का सबूत उनके पास मौजूद है, जबकि नकद दी गई राशि की कोई रसीद उन्हें नहीं दी गई।
ब्याज भरकर बिगड़ी मरीज की हालत, चेक भी हुआ बाउंस
एक अन्य पीड़ित विक्रम ने बताया कि उन्होंने भी अपने बच्चों के वीजा के लिए 6 लाख रुपये दिए थे। वीजा रिफ्यूज होने के बाद एजेंसी की मैडम भावना और बबीता के साथ सितंबर में 4 लाख रुपये वापसी का समझौता हुआ था। हालांकि, जब वे बैंक में पैसे निकालने गए तो दिया गया चेक बाउंस हो गया।
इमिग्रेशन एजेंसी का पक्ष: समझौते के तहत पैसे देने को तैयार
पूरे विवाद पर ‘किंगडम कंसलटेंट’ के कर्मी करण ने अपना पक्ष रखते हुए माना कि परिवार वीजा आवेदन लेकर आया था और फाइल रिफ्यूज हो गई थी। उन्होंने दावा किया कि परिवार के साथ 2.80 लाख रुपये में लिखित समझौता हुआ था और वे चेक बाउंस होने के बावजूद यह रकम देने को तैयार हैं, लेकिन अब परिवार 5 लाख रुपये की मांग पर अड़ा है। कर्मचारी ने यह भी कहा कि विक्रम वाले मामले में भी वे तय समझौते के मुताबिक 4 लाख रुपये लौटाने के लिए राजी हैं।
इंसाफ न मिलने तक डटे रहने की चेतावनी
इमिग्रेशन दफ्तर द्वारा महिला स्टाफ को घर भेजे जाने के बाद माहौल और ज्यादा गरमा गया है। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि ट्रैवल एजेंट जिम्मेदारी से भागने की कोशिश कर रहा है। किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि मामला इमिग्रेशन से जुड़ा है, इसलिए वे फिलहाल पुलिस शिकायत के बजाय सीधे मोर्चे के जरिए दबाव बनाएंगे। जब तक पीड़ितों का पूरा पैसा ब्याज समेत वापस नहीं मिल जाता, तब तक दफ्तर के बाहर धरना जारी रहेगा।