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इमरजेंसी लगाना गलती थी, इंदिरा गांधी को भी बाद में हुआ इसका अहसास: सोनिया गांधी

राजीव गांधी ने इमरजेंसी लगाने का किया था विरोध, संजय गांधी के दबाव का भी किया जिक्र; आगामी किताब में किए कई खुलासे

भारत इंफो, नई दिल्ली

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाई गई इमरजेंसी को गलती करार दिया है। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि इंदिरा गांधी को भी बाद में इस फैसले की गलती का अहसास हो गया था और वह इस कदम को लेकर सहज नहीं थीं।

सोनिया गांधी ने अपनी आगामी संस्मरण पुस्तक *Belonging: A Journey of Love’ में इमरजेंसी के दौरान गांधी परिवार के भीतर हुए मतभेदों का भी उल्लेख किया है। ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी मूल रूप से लोकतांत्रिक सोच वाली नेता थीं, लेकिन इमरजेंसी के दौरान परिस्थितियों और दबावों ने उन्हें प्रभावित किया।

सोनिया गांधी के मुताबिक, उनके पति और इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी ने इमरजेंसी लगाने के फैसले का विरोध किया था। राजीव चाहते थे कि उनकी मां अगले चुनाव का इंतजार करें। वहीं, संजय गांधी इस फैसले के समर्थन में थे और उनका मानना था कि विपक्ष को रोकना जरूरी है।

सोनिया ने कहा कि परिवार के भीतर भी इस मुद्दे पर तनाव पैदा हुआ था। राजीव गांधी ने अपनी मां के सामने विरोध जताने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उनकी बात नहीं मानी। सोनिया ने अपनी पुस्तक में यह भी लिखा है कि यदि संजय गांधी को नियंत्रण में रखा गया होता तो इमरजेंसी के बाद पैदा हुए हालात और नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।

‘द हिंदू’ को दिए एक अन्य इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि इमरजेंसी के लिए केवल संजय गांधी जिम्मेदार नहीं थे। इंदिरा गांधी पर उनके कुछ वरिष्ठ सहयोगियों का भी दबाव था। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी जैसे कुछ ही लोग थे, जो उनसे अलग राय रखते थे।

सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी ने बाद में हालात को समझा और इमरजेंसी के दौरान हुई ज्यादतियों पर सार्वजनिक रूप से खेद जताते हुए माफी भी मांगी थी।

उल्लेखनीय है कि 25 जून 1975 को देश में इमरजेंसी लागू की गई थी। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगे, विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया और प्रेस की आजादी प्रभावित हुई। जनवरी 1977 में इंदिरा गांधी ने लोकसभा चुनाव कराने की घोषणा की। चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और 21 मार्च 1977 को इमरजेंसी समाप्त कर दी गई।

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