भारत इंफो, चंडीगढ़
वरिष्ठ अकाली नेता एवं पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी प्रमुख ज्ञानी हरप्रीत सिंह के साथ विचारधारा, कार्यशैली और पंथक एकता को लेकर मतभेदों को अपने फैसले की वजह बताया है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, चंदूमाजरा ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में पंजाब और पंथ के हितों की रक्षा के लिए सभी अकाली और पंथक संगठनों का एक साझा मंच पर आना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सभी संगठनों को आपसी मतभेद भुलाकर सामूहिक रणनीति अपनानी चाहिए। चंदूमाजरा के अनुसार, पंथक एकता को लेकर उनके द्वारा की गई अपील पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह की सार्वजनिक प्रतिक्रिया से उन्हें एहसास हुआ कि दोनों के विचारों, सिद्धांतों और काम करने के तरीकों में अंतर है। इसी कारण उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला लिया।उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी से इस्तीफा देने के बावजूद पंथ, पंजाब, पंजाबी पहचान और राज्य के अधिकारों की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पहले की तरह कायम रहेगी।
अकाली राजनीति में बढ़ सकती है हलचल
प्रो. चंदूमाजरा का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब पंजाब में विभिन्न अकाली और पंथक संगठनों को एक मंच पर लाने की कोशिशें चल रही हैं। उनके इस फैसले से अकाली राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।