दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) और थोक विक्रेताओं को मिलने वाली कीमत (PTR) में भारी अंतर
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सवाल उठाया कि क्या पूरा सिस्टम दवा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रहा
भारत इंफो, नई दिल्ली
दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) और थोक विक्रेताओं को मिलने वाली कीमत (PTR) में भारी अंतर पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सवाल उठाया कि क्या पूरा सिस्टम दवा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रहा है। अदालत ने राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) को भी लगभग निष्क्रिय बताते हुए दवा मूल्य निर्धारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले एक इंजेक्शन का उदाहरण दिया, जो डीलर को 11,000 रुपये में मिलता है, लेकिन निजी अस्पताल में मरीज से उसी इंजेक्शन के लिए 1.30 लाख रुपये वसूले गए। अदालत ने इसे मरीजों का शोषण बताते हुए पूछा कि इतनी बड़ी कीमत का अंतर किस आधार पर है और पैसा कहां जा रहा है।
केंद्र सरकार ने दलील दी कि भारत में दवाओं की कीमतें दुनिया के कई देशों से कम हैं और सरकार मूल्य निर्धारण नीति की लगातार समीक्षा कर रही है। हालांकि, अदालत इससे संतुष्ट नहीं हुई।
गौरतलब है कि केंद्र ने कैंसर की दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है, जिससे मरीजों को सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने अन्य दवाओं की कीमतों और व्यापारिक मार्जिन पर भी नियंत्रण की जरूरत पर सवाल उठाए। अदालत ने मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।