loader-image
Jalandhar, IN
temperature icon 33°C
Breaking News

टकसाली भाजपाई फिर नजरअंदाज, पुराने कांग्रेसी के हाथ पंजाब भाजपा की कमान

मनुपाल शर्मा, भारत इंफो : पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं और इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी सौंप दी है। भाजपा हाईकमान के इस फैसले को पंजाब की जातीय और सियासी राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि पार्टी हाई कमान के इस फैसले से टकसाली भाजपाइयों में अंदर ही अंदर भारी मायूसी भी पाई जा रही है।

भाजपा ने भी जट्ट सिख चेहरे पर दांव खेला है। पंजाब की राजनीति में लंबे समय से इंडियन नेशनल कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल जट्ट सिख नेतृत्व को आगे रखती रही हैं और अब भाजपा भी उसी रणनीति पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। पार्टी नेतृत्व का यह फैसला यह बताता है कि भाजपा भी सोच रही है कि पंजाब में सत्ता तक पहुंचने के लिए जट्ट सिख नेतृत्व को प्रमुखता देना राजनीतिक रूप से जरूरी है।

हालांकि भाजपा का यह फैसला पार्टी के भीतर ही कई सवाल खड़े कर रहा है। खासकर उन टकसाली भाजपाइयों में अंदरखाते नाराजगी देखी जा रही है, जो दशकों से पार्टी के लिए संघर्ष करते रहे हैं। भाजपा के कठिन दौर में पार्टी का झंडा उठाए रखने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि इस बार संगठन की कमान किसी पुराने और समर्पित चेहरे को मिलेगी, लेकिन हाईकमान ने एक बार फिर बाहरी पृष्ठभूमि वाले पूर्व कांग्रेस नेता पर भरोसा जताया है।

दिलचस्प बात यह है कि भाजपा में कई पुराने सिख चेहरे मौजूद हैं, जिन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए काम किया, लेकिन उन्हें नेतृत्व की दौड़ में तरजीह नहीं मिली। इसके उलट करीब चार वर्ष पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए केवल सिंह ढिल्लों को आगे कर दिया गया। इससे पार्टी के अंदर यह संदेश भी गया है कि भाजपा पंजाब में पारंपरिक कैडर राजनीति से ज्यादा चुनावी समीकरणों को प्राथमिकता दे रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति के पीछे सिर्फ संगठनात्मक कारण नहीं, बल्कि भविष्य की गठबंधन राजनीति भी एक बड़ा कारण हो सकती है। ढिल्लों को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी माना जाता है। कैप्टन अमरिंदर सिंह स्वयं कई बार सार्वजनिक रूप से भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन की वकालत कर चुके हैं।

यही कारण है कि अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या भाजपा भविष्य में शिरोमणि अकाली दल के साथ फिर से समीकरण बनाने की तैयारी कर रही है। कयास यह भी लगाया जा रहे हैं कि केवल सिंह ढिल्लों भी अकाली-भाजपा गठबंधन के पक्षधर हो सकते हैं, हालांकि इस पर अभी खुलकर कुछ नहीं कहा गया है।

दूसरी ओर भाजपा के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद भी उभरने लगे हैं। पार्टी का एक वर्ग मानता है कि पंजाब में मजबूत जनाधार बनाने के लिए अकाली दल के साथ गठबंधन व्यावहारिक विकल्प हो सकता है, जबकि दूसरा वर्ग यह मानता है कि अकाली दल से अलग होकर भाजपा पहली बार पंजाब में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बना रही है और ऐसे समय में गठबंधन पार्टी के विस्तार को सीमित कर सकता है।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि भाजपा हाईकमान फिलहाल पंजाब में सामाजिक संतुलन और चुनावी गणित दोनों को साधने की कोशिश कर रहा है। किसान आंदोलन के बाद ग्रामीण पंजाब में भाजपा की छवि को हुए नुकसान की भरपाई के लिए जट्ट सिख चेहरे को आगे करना उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या लगातार बाहरी नेताओं को प्राथमिकता देने से भाजपा का पुराना कैडर हतोत्साहित होगा। पार्टी के कई पुराने कार्यकर्ता मानते हैं कि यदि समर्पित नेताओं की अनदेखी जारी रही तो संगठनात्मक स्तर पर असंतोष और बढ़ सकता है।

ऐसे में केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति सिर्फ एक संगठनात्मक फेरबदल नहीं, बल्कि पंजाब भाजपा की आने वाली राजनीतिक दिशा, सामाजिक रणनीति और संभावित गठबंधन राजनीति का संकेत भी मानी जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *