भारत इंफो : चंडीगढ़ में शिरोमणि अकाली दल की कोर कमेटी की अहम बैठक सुखबीर सिंह बादल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य केंद्र 7 महीने बाद जेल से बाहर आए पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया रहे। मजीठिया ने पार्टी की मजबूती के लिए एक बड़ा भावनात्मक कार्ड खेलते हुए कहा कि वह बिखरे हुए अकाली धड़ों को एक साथ लाने के पक्ष में हैं।
उन्होंने साफ किया कि पंजाब के हितों के लिए अगर उन्हें नंगे पैर भी दूसरे नेताओं के पास जाना पड़ा, तो वह पीछे नहीं हटेंगे। उनके इस कदम को पार्टी प्रमुख सुखबीर बादल ने भी हरी झंडी दे दी है और राजनीतिक गलियारों में इसे अकाली दल के पुनरुत्थान की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
बिट्टू और राहुल गांधी के विवाद को बताया ‘अंदरूनी मामला’
बीजेपी और कांग्रेस के बीच चल रही जुबानी जंग, खासकर रवनीत बिट्टू को ‘गद्दार’ कहे जाने के मुद्दे पर मजीठिया ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और बिट्टू के बीच पुराना और गहरा रिश्ता रहा है, जो अब टूट गया है। मजीठिया के अनुसार, यह इन दोनों का आपसी मामला है और कौन जाने कल वे फिर साथ बैठकर चाय पी रहे हों। उन्होंने बेअंत सिंह के परिवार और गांधी परिवार के पुराने रिश्तों का हवाला देते हुए इस विवाद को ज्यादा तवज्जो देने से इनकार कर दिया।
जेल में इमरान खान जैसी स्थिति और सुरक्षा पर गंभीर सवाल
मजीठिया ने जेल के अपने अनुभवों को साझा करते हुए पंजाब सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल के भीतर उनके साथ वैसा ही बर्ताव किया गया जैसा पाकिस्तान में इमरान खान के साथ हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताएं दोहराईं।
मजीठिया ने सीधे तौर पर कहा कि अगर उनके साथ सिद्धू मूसेवाला जैसा कोई हादसा होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पंजाब के मौजूदा डीजीपी की होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उन पर पाबंदियां लगाना चाहती है, लेकिन वे झुकेंगे नहीं।
एडहॉक डीजीपी और कानून व्यवस्था पर प्रहार
पंजाब की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मजीठिया ने कहा कि राज्य में ‘एडहॉक’ यानी कामचलाऊ डीजीपी की परंपरा पुलिसिंग को बर्बाद कर रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए कहा कि जब तक पंजाब को पक्का डीजीपी नहीं मिलता, तब तक अफसरशाही केवल राजनीतिक आकाओं को खुश करने में लगी रहेगी। उन्होंने पुलिस पर सरकारी दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि आरटीआई कार्यकर्ताओं और मीडिया की आवाज को दबाया जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।