भारत इंफो : मंगलवार को म्यांमार के साथ-साथ भारत के पश्चिम बंगाल और पड़ोसी देश बांग्लादेश में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब रिक्टर स्केल पर 5.9 तीव्रता वाले भूकंप ने दस्तक दी।
यूरोपीय-मेडिटेरेनियन सिस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) की रिपोर्ट के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र म्यांमार के अक्स्याब (सिटवे) शहर से लगभग 70 मील पूर्व की ओर जमीन की गहराई में स्थित था।
हालांकि भूकंप का केंद्र म्यांमार में था, लेकिन इसकी तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसके कंपन सैकड़ों किलोमीटर दूर कोलकाता और ढाका जैसे महानगरों में भी स्पष्ट रूप से महसूस किए गए।
बंगाल और बांग्लादेश में दहशत का माहौल
भूकंप के झटके महसूस होते ही कोलकाता, हावड़ा और उत्तर 24 परगना जैसे इलाकों में लोग घबराकर अपनी बहुमंजिला इमारतों और दफ्तरों से बाहर निकल आए।
इसी तरह का मंजर बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भी देखने को मिला, जहां कंपन की वजह से लोग सड़कों पर जमा हो गए। राहत की बात यह रही कि अभी तक म्यांमार, भारत या बांग्लादेश के किसी भी क्षेत्र से जान-माल के बड़े नुकसान की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें स्थिति का आकलन करने में जुटी हुई हैं।
71 घंटों में तीसरी बार हिली म्यांमार की जमीन
विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय यह है कि पिछले 71 घंटों के भीतर म्यांमार में महसूस किया गया यह तीसरा भूकंप है। इससे पहले भी क्षेत्र में दो बार हल्के झटके दर्ज किए जा चुके हैं, जो इस इलाके में बढ़ती भूगर्भीय हलचल की ओर इशारा करते हैं। EMSC और अन्य वैज्ञानिक संस्थाएं इन लगातार आ रहे झटकों पर पैनी नजर रख रही हैं ताकि भविष्य के जोखिमों का अनुमान लगाया जा सके।
क्यों संवेदनशील है यह क्षेत्र?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो म्यांमार और इसके आसपास का क्षेत्र भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि यह क्षेत्र इंडो-ऑस्ट्रेलियन और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के जंक्शन यानी मिलन स्थल पर स्थित है।
इन प्लेटों के बीच होने वाली निरंतर हलचल और दबाव के कारण यहां अक्सर ऊर्जा का उत्सर्जन होता है, जो भूकंप के रूप में सतह पर महसूस किया जाता है। विशेषज्ञों ने स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने और भूकंप के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी है।