भारत इंफो : जालंधर के गोराया में उस समय मातम छा गया, जब रूस-यूक्रेन युद्ध में मनदीप कुमार के मौत की खबर परिजनों को पता चली। 30 वर्षीय मनदीप बेहतर भविष्य और रोजगार के सुनहरे सपने लेकर विदेश गया था, लेकिन उसे क्या मालूम था कि ट्रैवल एजेंटों का लालच उसे मौत के मुहाने पर खड़ा कर देगा। मनदीप को धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया था और कई महीनों तक लापता रहने के बाद अब उसकी मृत्यु की पुष्टि हुई है। इस घटना ने एक बार फिर अवैध रूप से विदेश भेजने वाले एजेंटों के काले कारनामों को उजागर कर दिया है।
आर्मेनिया से शुरू हुआ सफर और रूस में जाकर फंसी जान
मनदीप कुमार के संघर्ष की कहानी 17 सितंबर 2023 को शुरू हुई थी, जब वह अपने एक रिश्तेदार और तीन अन्य परिचितों के साथ अमृतसर से आर्मेनिया के लिए रवाना हुआ था। आर्मेनिया पहुंचने के बाद इन सभी ने लगभग तीन महीने तक मजदूरी का काम किया। इसके बाद 9 दिसंबर 2023 को यह समूह रूस पहुंचा।
रूस पहुंचने के कुछ समय बाद मनदीप के बाकी साथी तो भारत वापस लौट आए, लेकिन मनदीप वहीं रुक गया। परिवार का आरोप है कि इसी दौरान ट्रैवल एजेंटों ने उसे नौकरी का झांसा देकर ऐसी परिस्थितियों में फंसा दिया जहां उसे जबरन युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया।
दिव्यांग होने के बावजूद सेना में भर्ती पर उठे सवाल
मृतक के भाई जगदीप कुमार ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि मनदीप शारीरिक रूप से दिव्यांग था। चिकित्सा और सैन्य नियमों के अनुसार, कोई भी दिव्यांग व्यक्ति सेना में भर्ती होने के योग्य नहीं होता। ऐसे में परिवार अब इस बात की तहकीकात कर रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में और किस आधार पर उसे रूसी सेना का हिस्सा बनाया गया।
इलाके में शोक की लहर और एजेंटों के खिलाफ बढ़ता गुस्सा
मनदीप का शव गांव पहुँचते ही पूरे गोराया में शोक की लहर दौड़ गई है। परिजनों में उन ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ भारी गुस्सा है जिन्होंने मनदीप को गलत जानकारी देकर मौत के जाल में धकेला। फिलहाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन भी इस मामले पर नजर रखे हुए है। यह घटना उन हजारों युवाओं के लिए एक चेतावनी है जो बिना पूरी जांच-पड़ताल के एजेंटों के बहकावे में आकर युद्धग्रस्त देशों का रुख कर लेते हैं।