भारत इंफो :
पंजाब के रिटायर्ड इंस्पेक्टर जनरल (IG) अमर सिंह चहल के साथ हुई 8.10 करोड़ रुपये की सनसनीखेज साइबर ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जाँच एजेंसियों ने अब तक इस नेटवर्क से जुड़े 25 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिससे करीब 3 करोड़ रुपये का लेनदेन रुक गया है।
महाराष्ट्र से जुड़े ठगी के तार, 3 मुख्य आरोपी चिन्हित
पटियाला पुलिस और साइबर सेल की जाँच में सामने आया है कि इस बड़े गिरोह का केंद्र महाराष्ट्र है। पुलिस ने महाराष्ट्र से जुड़े 3 मुख्य संदिग्धों की पहचान कर ली है। तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रेल के आधार पर पुलिस की एक हाई-लेवल टीम छापेमारी कर रही है। आशंका है कि इस गिरोह में 10 से अधिक लोग शामिल हैं, जो फर्जी पहचान और डिजिटल हथकंडों का उपयोग करके लोगों को शिकार बनाते हैं।
शेयर ट्रेडिंग और बैंक CEO बनकर दिया झांसा
जाँच में खुलासा हुआ है कि ठगों ने बेहद शातिर तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया। मुख्य आरोपी ने खुद को एक निजी बैंक का मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO (रजत वर्मा) बताकर रिटायर्ड IG से संपर्क किया था। उन्हें शेयर ट्रेडिंग में कम समय में मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया गया। आरोपियों ने पैसे की ट्रैकिंग से बचने के लिए ठगी की रकम को दर्जनों अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया था।
IG चहल की हालत अब स्थिर, जल्द दर्ज होगा बयान
बता दें कि 22 दिसंबर को ठगी का पता चलने पर भारी तनाव में आकर अमर सिंह चहल ने खुद को गोली मार ली थी। हालांकि, अब वे खतरे से बाहर हैं।
• हेल्थ अपडेट: डॉक्टरों के अनुसार, वे वेंटिलेटर से बाहर हैं और सामान्य रूप से सांस ले रहे हैं। सर्जरी के बाद उनकी हालत में सुधार है।
• बयान की प्रक्रिया: डॉक्टरों की अनुमति मिलते ही रविवार को अस्पताल में उनका आधिकारिक बयान दर्ज किया जा सकता है, जिससे मामले में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
फर्जी पहचान का मायाजाल
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी अलग-अलग मोबाइल नंबरों और फर्जी आईडी का इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस इस बात की भी गहनता से जाँच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने पंजाब के अलावा अन्य राज्यों के रसूखदार लोगों को भी अपना निशाना बनाया है।