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पंजाब के पूर्व राज्यपाल शिवराज पाटिल का निधन, चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने की करी थी वकालत

भारत इंफो : देश की राजनीति के एक वरिष्ठ अध्याय का शुक्रवार को अंत हो गया। पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और पंजाब के पूर्व राज्यपाल शिवराज पाटिल का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने महाराष्ट्र के लातूर स्थित अपने आवास पर शुक्रवार सुबह करीब 6.30 बजे अंतिम सांस ली। पाटिल पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।

पंजाब राजभवन और चंडीगढ़ प्रशासन में रहा अहम योगदान

शिवराज पाटिल का पंजाब और चंडीगढ़ से गहरा प्रशासनिक नाता रहा है। वे साल 2010 से लेकर 2015 तक पंजाब के राज्यपाल पद पर आसीन रहे। इसके साथ ही उन्होंने चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया था। उनका लंबा राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक समझ पंजाब के राजभवन के कामकाज में स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी।

चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने की करी थी वकालत

अपने कार्यकाल के दौरान शिवराज पाटिल अपने बेबाक बयानों और स्पष्टवादी सोच के लिए भी जाने जाते थे। साल 2012 में पंजाब विधानसभा में अपने अभिभाषण के दौरान उन्होंने एक ऐतिहासिक बयान दिया था, जिसकी काफी चर्चा हुई थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि चंडीगढ़ को पंजाब में शामिल कर दिया जाना चाहिए और पंजाबी भाषी क्षेत्रों को पंजाब में मिलाने की मांग को केंद्र सरकार को मान लेना चाहिए।

केंद्र की नीतियों पर भी उठाए थे सवाल

सिर्फ सीमाओं के मुद्दे पर ही नहीं, बल्कि संघीय ढांचे को लेकर भी पाटिल के विचार काफी सख्त थे। उन्होंने एक बार केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि केंद्र जिस तरह से राज्यों की जमीनी जरूरतों को समझे बिना नीतियां और योजनाएं थोपता है, उससे राज्यों की स्थिति भिखारियों जैसी होकर रह गई है। राज्यों के अधिकारों के प्रति उनकी यह मुखरता आज भी याद की जाती है।

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