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जालंधर फोर्टिस हॉस्पिटल ने कम्युनिटी इमरजेंसी रिस्पांस को मज़बूत करने के लिए CPR ट्रेनिंग पहल की शुरुआत की

भारत इंफो : कम्युनिटी इमरजेंसी रिस्पांस और इस संबंधी तैयारियों को मज़बूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, फोर्टिस हॉस्पिटल, जालंधर ने आज अपने चल रहे ‘फोर्टिस है ना’ अभियान के तहत सीपीआर जागरूकता और प्रशिक्षण अभियान शुरू किया। इस पहल का उद्देश्य नागरिकों को महत्वपूर्ण जीवन रक्षक कौशल से लैस करना है, और इस संदेश को मजबूती से जन जन तक पहुंचाना है कि किसी भी आपात स्थिति में-फोर्टिस आपके साथ है।

यह कोऑर्डिनेटड अभियान भारत के सभी फोर्टिस अस्पतालों में एक साथ चलाया गया, जिसमें दो ग्लेनीगल्स अस्पतालों ने भी भाग लिया, जिससे यह नेटवर्क द्वारा अब तक की सबसे बड़ी सीपीआर ट्रेनिंग पहल बन गई। इस अभियान ने अस्पतालों और सामुदायिक स्थलों में 4,000 से अधिक प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया है।

प्रत्येक 90 मिनट के सत्र में सीपीआर तकनीकें, दम घुटने से बचाव के तरीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन और इमरजेंसी मेडिसन स्पेशलिस्ट्स, प्रशिक्षित नर्सों और प्रमाणित सीपीआर प्रशिक्षकों के नेतृत्व में एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सेशन भी शामिल था। प्रतिभागियों को भागीदारी प्रमाणपत्र और एक फर्स्ट एड बुकलेट भी प्रदान की गई जिसमें प्रमुख इमरजेंसी रिस्पांस के सभी कदमों के बारे में जानकारी दी गई है।

अस्पताल परिसर से आगे बढ़कर, ये सेशन सीटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, जालंधर के सहयोग से आयोजित किए गए। इसका उद्देश्य जीवन रक्षक ज्ञान को सीधे समुदायों तक पहुंचाना, छात्रों, कॉर्पोरेट कर्मचारियों, फिटनेस प्रशिक्षकों, यातायात पुलिस, टैक्सी चालकों और फर्स्ट रिस्पांडर्स तक पहुंचना है, ताकि आपात स्थिति के दौरान कार्रवाई करने के लिए अधिक आत्मविश्वासी और सक्षम जनता तैयार हो सके।

डॉ.रितु गर्ग, चीफ ग्रोथ एंड इनोवेशन ऑफिसर, फोर्टिस हेल्थकेयर ने कहा कि “आपात स्थिति कहीं भी हो सकती है-घर पर, वर्कप्लेस पर या सड़क पर। इस सीपीआर ट्रेनिंग अभियान के माध्यम से, हम प्रत्येक व्यक्ति को मेडिकल सहायता पहुंचने से पहले उन महत्वपूर्ण क्षणों में प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने का आत्मविश्वास प्रदान करना चाहते हैं। यह पहल हमारी ‘फोर्टिस है ना’ प्रतिबद्धता—समुदाय के भीतर विश्वास और तैयारी का निर्माण—के मूल में है।”

फोर्टिस अस्पताल, जालंधर के इमरजेंसी सर्विसेज के प्रमुख डॉ. मनदीप सिंह ने कहा कि “इमरजेंसी में, हर सेकंड मायने रखता है। जब हृदय गति रुक जाती है, तो आसपास के लोगों की तत्काल रिस्पांस बहुत बड़ा अंतर ला सकती है। सीपीआर केवल एक मेडिकल स्किल नहीं है, यह एक लाइफ स्किल है जो सभी को आना चाहिए। स्टडीज से पता चलता है कि लगभग 80% हृदय गति रुकने की घटनाएं अस्पतालों के बाहर होती हैं, जिसका अर्थ है कि बचने की संभावना तत्काल आसपास के लोगों के इंटरवेंशन पर निर्भर करती है।

हालांकि, पश्चिमी देशों में 18% की तुलना में 2% से भी कम भारतीय सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) में प्रशिक्षित हैं। प्रशिक्षण और जागरूकता की यह कमी जीवित रहने की दर को काफी कम कर देती है। हजारों नागरिकों को सीपीआर और बेसिक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण देकर, हमारा लक्ष्य फर्स्ट रिस्पांडर्स का एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क बनाना है।”

‘फोर्टिस है ना’ अभियान, इमरजेंसी और ट्रामा सर्विसेज, को बढ़ावा देने के लिए फोर्टिस की व्यापक पहल का एक हिस्सा है, जो समय पर इंटरनेशन, एक्सपर्ट केयर और सामुदायिक विश्वास पर ज़ोर देता है। अस्पताल अनुभवी प्रोफेशनल्स और अत्याधुनिक सुविधाओं द्वारा समर्थित विश्व स्तरीय इमरजेंसी मेडिकल केयर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इमरजेंसी अभियान चौबीसों घंटे इमरजेंसी और ट्रामा केयर प्रदान करने के लिए अस्पताल की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

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