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जालंधर में डीसी ऑफिस के बाहर गरजे शिक्षक, एक हफ्ते का दिया अल्टीमेटम

भारत इंफो : जालंधर में अध्यापकों से लगातार ली जा रही गैर-शैक्षणिक और दोहरी-तेहरी ड्यूटियों के विरोध में आज शहर के शिक्षक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। एलीमेंट्री टीचर यूनियन और सांझा अध्यापक मोर्चा पंजाब के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने उपायुक्त (डीसी) कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों का आरोप है कि उन्हें अध्यापन कार्य से हटाकर प्रशासनिक कार्यों में उलझाया जा रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।

शिक्षा पर पड़ रहा नकारात्मक असर
एलीमेंट्री टीचर यूनियन के जनरल सेक्रेटरी रामपाल ने बताया कि स्कूलों में पहले ही शिक्षकों की भारी कमी है। इसके बावजूद उन्हें जनगणना और ड्रग सेंसस जैसे कामों में लगाया गया है। एक शिक्षक पर कई तरह के काम थोपने से न केवल बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि शिक्षक भी गंभीर मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा वादाखिलाफी की जा रही है, क्योंकि चुनाव से पहले यह आश्वासन दिया गया था कि शिक्षकों को केवल पढ़ाने के काम तक ही सीमित रखा जाएगा और अन्य कार्यों के लिए अलग से युवाओं को नियुक्त किया जाएगा।

धमकियों और प्रताड़ना का आरोप
सांझा अध्यापक मोर्चा के नेताओं ने आरोप लगाया कि ड्रग सेंसस का कार्य स्वेच्छा पर आधारित होना चाहिए, लेकिन विभाग द्वारा उन शिक्षकों को नौकरी से निकालने और वेतन रोकने की धमकियां दी जा रही हैं जो यह काम नहीं करना चाहते हैं। इन शिक्षकों को ‘कारण बताओ नोटिस’ थमाकर प्रताड़ित किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी शिक्षकों की मांग है कि दोहराई गई ड्यूटियों को तुरंत रद्द किया जाए, ड्रग सेंसस का काम बेरोजगार युवाओं को दिया जाए और शिक्षकों को जारी किए गए सभी उत्पीड़न वाले नोटिस बिना शर्त वापस लिए जाएं।

प्रशासन का आश्वासन और भविष्य की रणनीति
डीसी जालंधर द्वारा प्राप्त आश्वासन के बाद शिक्षकों ने फिलहाल अपना रुख नरम किया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोहरी ड्यूटियां रद्द की जाएंगी और काम केवल वॉलंटियर के माध्यम से ही होगा। हालांकि, शिक्षक संगठनों ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर उनके खिलाफ जारी किए गए सभी नोटिस वापस नहीं लिए गए, तो वे पूरे राज्य में व्यापक स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

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