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16,000 करोड़ का भारी बोझ! अमेरिका-ईरान की जंग से भारत की अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट

भारत इंफो : वैश्विक राजनीति में बढ़ती गर्माहट के बीच कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर दुनिया भर के बाजारों में हलचल मचा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती जुबानी जंग का सीधा असर ईंधन की कीमतों पर दिख रहा है, जहां ब्रेंट क्रूड आज 110 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को कड़े परिणाम भुगतने की चेतावनी दिए जाने के बाद ईरान ने भी वैश्विक तेल सप्लाई ठप करने की बात कही है, जिससे निवेशकों में घबराहट साफ देखी जा रही है। आज बाजार खुलते ही ब्रेंट क्रूड की कीमत में 1.71 डॉलर की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह 110.74 डॉलर के स्तर पर पहुँच गया है।

बाजार विशेषज्ञों की चिंता और संभावित खतरे
बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच यह तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में स्थितियां और भी भयावह हो सकती हैं। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता के चलते कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी छू सकती हैं। ईरान द्वारा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज रूट’ को लगभग बंद किए जाने से सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। आपको बता दें कि दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है, और इसके बंद होने का मतलब है कि दुनिया भर में ऊर्जा का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा बड़ा असर
भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमतों में मात्र 1 डॉलर की बढ़ोतरी भी साल भर बनी रहती है, तो भारत का सालाना आयात बिल करीब 16,000 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है। ऐसे में 110 डॉलर के पार जाती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और राजकोषीय घाटे पर भारी दबाव डालेंगी, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ना तय माना जा रहा है।

अन्य वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी
तेल की कीमतों में लगी इस आग का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहने वाला है। होर्मुज रूट के बाधित होने से न केवल कच्चा तेल, बल्कि एल्युमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक जैसे कच्चे माल की कीमतों में भी भारी तेजी आने लगी है। सप्लाई चेन रुकने से उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिससे आने वाले समय में खेती से लेकर निर्माण क्षेत्र तक हर चीज महंगी हो सकती है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के अगले कदमों पर टिकी हैं कि क्या यह तनाव युद्ध का रूप लेगा या कूटनीति से इसका समाधान निकलेगा।

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