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होनहार छात्र की जान ले गया जर्जर बास्केटबॉल पोल, पुणे हादसे ने फिर याद दिलाई रोहतक की वो घटना

भारत इंफो : पुणे में बास्केटबॉल की ट्रेनिंग ले रहे एक 20 वर्षीय युवक की पोल गिरने से जान चली गई। मृतक की पहचान बाबूराम वर्मा के रूप में हुई है, जो बीटेक का छात्र था और अपने भविष्य के सपनों को लेकर कड़ी मेहनत कर रहा था। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, यह हादसा उस समय हुआ जब बाबूराम रोजाना की तरह अपनी प्रैक्टिस में व्यस्त था। इस घटना के बाद पूरे संस्थान में मातम का माहौल है और खेल परिसरों में सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मौके पर ही छात्र ने तोड़ा दम
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बास्केटबॉल कोर्ट का भारी-भरकम पिलर (रिंग वाला पोल) अचानक बाबूराम के ऊपर गिर गया, जिससे उसे संभलने का मौका तक नहीं मिला। तोलानी मरीन इंस्टीट्यूट में चल रही इस ट्रेनिंग के दौरान हुए इस हादसे में बाबूराम की मौके पर ही मौत हो गई।

स्थानीय पुलिस ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए लापरवाही बरतने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर ली है। जांच अधिकारी अब इस पहलू पर गौर कर रहे हैं कि क्या पोल की स्थिति पहले से ही खराब या जर्जर थी और क्या संस्थान ने समय रहते इसकी मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया था।

लापरवाही पर पुलिस की कड़ी कार्रवाई
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शुरुआती जांच में यह बात सामने आ रही है कि कोर्ट के बुनियादी ढांचे के रखरखाव में कमी रही होगी, जिसके कारण इतना बड़ा हादसा हुआ। पुलिस अब तकनीकी टीम की मदद से पोल के गिरने के सटीक कारणों का पता लगा रही है। संस्थान के प्रबंधन से भी इस संबंध में पूछताछ की जा रही है कि आखिर इतने संवेदनशील स्थान पर जहां सैकड़ों छात्र अभ्यास करते हैं, वहां सुरक्षा ऑडिट नियमित रूप से क्यों नहीं किया गया।

खेल के मैदानों में सुरक्षा पर उठते सवाल
देश में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है, जिसने खेल प्रेमियों और अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया हो। इससे पहले करीब पांच महीने पहले हरियाणा के रोहतक में भी ऐसी ही एक दुखद घटना घटी थी, जहां 16 साल के उभरते बास्केटबॉल खिलाड़ी हार्दिक राठी की जान चली गई थी। बार-बार हो रहे इन हादसों ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारे खेल के मैदान युवाओं के लिए वास्तव में सुरक्षित हैं। खेल विशेषज्ञ अब मांग कर रहे हैं कि सभी शिक्षण संस्थानों और स्पोर्ट्स क्लबों में लगे उपकरणों की समय-समय पर फिटनेस जांच अनिवार्य की जानी चाहिए।

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