भारत इंफो : भारतीय आसमान में उड़ने वाले विमानों की सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जनवरी 2025 से शुरू हुई देश की छह प्रमुख एयरलाइंस की सघन जांच में यह बात सामने आई है कि कुल 754 विमानों में से 377 विमान ऐसे हैं जिनमें तकनीकी खराबियां बार-बार दस्तक दे रही हैं।
यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इन विमानों में एक ही तरह की समस्या बार-बार दर्ज की गई है, जबकि एयरलाइंस का दावा है कि उन्हें पहले ही दुरुस्त कर दिया गया था। सिस्टम की इस लाचारी का आलम यह है कि महत्वपूर्ण उपकरणों से लेकर संचार के साधनों तक में तकनीकी खामियां बरकरार हैं, जो सुरक्षित हवाई सफर के दावों पर सवालिया निशान लगाती हैं।
एअर इंडिया और इंडिगो की स्थिति सबसे चिंताजनक
तकनीकी विफलताओं की इस सूची में एअर इंडिया ग्रुप का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। समूह के कुल 267 विमानों की जांच की गई, जिनमें से 191 विमानों यानी लगभग 72 प्रतिशत बेड़े में ‘रिपीटेटिव डिफेक्ट’ पाए गए। टाटा समूह की इस एयरलाइन के बाद देश की सबसे बड़ी किफायती विमान सेवा इंडिगो का नंबर आता है।
इंडिगो के 405 विमानों के निरीक्षण में 148 विमानों में 3 फरवरी 2025 तक बार-बार होने वाली तकनीकी खामियां दर्ज की गईं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि विमानों के रखरखाव और मरम्मत की मौजूदा व्यवस्था में कहीं न कहीं बड़ी चूक हो रही है।
संसद में सरकार का पक्ष और कड़े कदम
लोकसभा में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने इन आंकड़ों को पेश करते हुए बताया कि सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) बेहद सक्रिय है। पिछले एक साल में सुरक्षा के मद्देनजर रिकॉर्ड स्तर पर जांच अभियान चलाए गए हैं।
इस दौरान डीजीसीए ने 3890 सर्विलांस इंस्पेक्शन, 56 ऑडिट और 492 रैंप चेक पूरे किए। इसके अलावा, 84 विदेशी विमानों की सघन जांच के साथ-साथ 874 स्पॉट चेक और 550 नाइट सर्विलांस भी किए गए ताकि विमानों के परिचालन में किसी भी तरह की कोताही न बरती जा सके।