भारत इंफो : पंजाब के वित्त आबकारी एवं कराधान मंत्री हरपाल सिंह चीमा के कड़े अनुशासन और जवाबदेही के निर्देशों के बाद राज्य कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने बिना सूचना के एक साल से अधिक समय से ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे चार कर्मचारियों के खिलाफ “डीम्ड रेजिग्नेशन” (मान लिया गया इस्तीफा) के आदेश जारी कर दिए हैं।
टैक्स कमिश्नर जतिंदर जोरवाल की तरफ सेजारी इस आदेश के तहत तीन आबकारी एवं कराधान निरीक्षकों और एक क्लर्क को सेवा से मुक्त कर दिया गया है। इन कर्मचारियों को विभाग द्वारा बार-बार कानूनी नोटिस दिए गए और ज्वाइन करने के अवसर प्रदान किए गए थे, लेकिन इन्होंने ड्यूटी पर लौटने में कोई रुचि नहीं दिखाई।
अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस की नीति
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार अनुशासनहीनता और कर्तव्य में लापरवाही के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रही है। सार्वजनिक सेवा के लिए समर्पण और कार्यस्थल पर उपस्थिति जरूरी है। जो कर्मचारी बिना किसी आधिकारिक अनुमति के सालों तक अनुपस्थित रहते हैं, उनके लिए प्रशासन में कोई जगह नहीं है। सरकार पंजाब के नागरिकों के लिए एक पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
नियमों के उल्लंघन पर गिरी गाज
इन कर्मचारियों की सेवाएं पंजाब सिविल सेवा नियम, 1970 के नियम 8 के तहत की गई गहन जांच के बाद समाप्त की गई हैं। कार्रवाई की जद में आए कर्मचारियों में जालंधर-2 का एक इंस्पेक्टर शामिल है, जो उच्च अधिकारियों द्वारा छुट्टी का आवेदन खारिज होने के बावजूद 15 मार्च 2023 से अनुपस्थित था।
इसी तरह एक अन्य इंस्पेक्टर 24 जून 2023 से लगातार ड्यूटी से गायब था और निलंबन के बावजूद अपने मुख्यालय में रिपोर्ट करने में विफल रहा। वहीं रोपड़ रेंज के एक इंस्पेक्टर पर भी कार्यवाही हुई है, जो 29 मई 2021 से अपनी विदेश यात्रा की छुट्टी समाप्त होने के बाद भी वापस नहीं लौटा।
उसने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था, लेकिन जांच में वह दोषी पाया गया क्योंकि उसने वर्चुअल माध्यम से भी जांच में हिस्सा नहीं लिया। जालंधर ऑडिट विंग के एक क्लर्क की सेवाएं भी 11 सितंबर 2023 से गायब रहने के कारण समाप्त कर दी गई हैं।