loader-image
Jalandhar, IN
temperature icon 27°C
Breaking News

प्रेम सिंह चंदूमाजरा की शिरोमणि अकाली दल में वापसी, सुखबीर बादल की मौजूदगी में फिर थामा पार्टी का दामन

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अकाली दल बादल को मिली मजबूती, पंथक एकता की दिशा में बड़ा कदम

 

भारत इंफो, पटियाला

पंजाब की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल (बादल) को बड़ी मजबूती मिली है। वरिष्ठ अकाली नेता एवं पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा शुक्रवार को दोबारा शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए। पटियाला स्थित चंदूमाजरा के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उनका स्वागत किया और उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।

चंदूमाजरा के साथ उनके बेटे एवं सनौर से पूर्व विधायक हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने भी अकाली दल में वापसी की है। उनके साथ कई समर्थक भी पार्टी में शामिल हुए।

पंथक एकता को बताया वापसी का आधार

अकाली दल में वापसी से पहले चंदूमाजरा ने शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने फैसले के पीछे अकाली और पंथक संगठनों को एक मंच पर लाने की जरूरत को प्रमुख कारण बताया था। उनका कहना था कि पंजाब और पंथ के हितों की रक्षा के लिए अकाली दल का एकजुट होना समय की मांग है।

गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद सुखबीर सिंह बादल की नेतृत्व शैली को लेकर उठे सवालों के बीच चंदूमाजरा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने बगावत कर दी थी। इसके बाद उन्होंने अलग होकर अकाली दल (पुनर सुरजीत) का गठन किया था, जिसकी अगुवाई पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह कर रहे थे। हालांकि, पंथक एकता और नेतृत्व के सवाल पर दोनों नेताओं के बीच मतभेद उभर आए।

2027 के चुनाव से पहले अकाली दल की रणनीति को मिलेगी धार

चंदूमाजरा की वापसी को केवल एक वरिष्ठ नेता की घर वापसी के तौर पर नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अकाली दल की राजनीतिक ताकत बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। चंदूमाजरा परिवार की अकाली दल में वापसी से विशेष रूप से पटियाला और सनौर क्षेत्र में पार्टी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

एक तरफ सुखबीर बादल पार्टी से अलग हुए नेताओं को वापस जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पंजाब में पंथक राजनीति को एकजुट करने की चुनौती भी उनके सामने है। ऐसे में चंदूमाजरा की वापसी अकाली दल के लिए आने वाले दिनों में दूसरे नाराज नेताओं की घर वापसी का रास्ता भी खोल सकती है।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *