भूटान के प्रसिद्ध गासा त्साचू हॉट स्प्रिंग्स तबाह, पुनाखा जोंग में प्रवेश बंद
असम के सीमावर्ती इलाकों में भी बाढ़ का खतरा पैदा हुआ
भारत इंफो, नई दिल्ली/सिलीगुड़ी
भूटान में ग्लेशियल झील के फटने (Glacial Lake Outburst Flood-GLOF) के बाद भारत के उत्तर बंगाल और असम के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। स्थिति को देखते हुए पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में करीब 12 हजार लोगों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी करते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और अन्य राहत एजेंसियों को सक्रिय कर दिया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भूटान के गासा जिले में स्थित शिंताफू झील (Shintaphu Lake) के तटबंध से गुरुवार शाम पानी बाहर निकलने के बाद भारी मात्रा में पानी, मिट्टी, पत्थर और मलबा मो छू (Mo Chhu) नदी के रास्ते आगे बढ़ा। इससे भारत में प्रवेश करने वाली संकोश नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका पैदा हुई। बताया गया है कि झील से लगभग 74 लाख घन मीटर पानी बाहर निकला।
भूटान के प्रसिद्ध गासा त्साचू हॉट स्प्रिंग्स तबाह, पुनाखा जोंग में प्रवेश बंद
भूटान में ग्लेशियल झील फटने से आई अचानक बाढ़ ने देश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गासा त्साचू (Gasa Tshachu) के प्राकृतिक गर्म पानी के झरनों को भी अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ के तेज बहाव में यहां पर्यटकों के लिए बनाई गई संरचनाएं बह गईं। इसके अलावा लाया गांव को जोड़ने वाली सड़क का एक हिस्सा भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। दो बेली ब्रिज भी बह जाने की आशंका जताई गई है। सड़क को अगले आदेश तक यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।
पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में संकोश नदी के किनारे बसे गांवों में प्रशासन ने रात से ही लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया था। राहत के लिए स्कूलों को अस्थायी शिविरों में बदला गया है, जहां लोगों के लिए भोजन, पीने के पानी, शिशु आहार और अन्य जरूरी सुविधाओं का प्रबंध किया गया है।
अलीपुरद्वार के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार शाह ने बताया कि हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन भूटान के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की।
पश्चिम बंगाल के अलावा असम के धुबरी और कोकराझार जिलों में भी प्रशासन को सतर्क किया गया है। दार्जिलिंग की पहाड़ियों, तराई और डुआर्स क्षेत्र के लोगों को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इस बीच केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने भी संभावित बाढ़ को लेकर संबंधित जिलों को सतर्क रहने की सलाह दी है। प्रशासन लगातार नदियों के जलस्तर पर नजर रख रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया जा सके।