भारत इंफो : जालंधर यूथ कांग्रेस (शहरी) के जिला अध्यक्ष अंगद दत्ता ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला किया है। उन्होंने प्रदेश सरकार पर पंजाब की महिलाओं को धोखा देने और चुनाव से पहले किए गए प्रमुख वादे को सिर्फ एक राजनीतिक हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया है। दत्ता का कहना है कि सरकार ने अपनी मुख्य चुनावी गारंटी को पूरी करने के बजाय राज्य की महिलाओं के साथ आर्थिक छल किया है।
51 महीने का बकाया, लेकिन दिए सिर्फ 3000 रुपये
दत्ता ने सरकार को उसके वादे की याद दिलाते हुए कहा कि AAP ने 16 मार्च 2022 को सत्ता संभाली थी और हर महिला को हर महीने 1,000 रुपये की वित्तीय सहायता देने का वादा किया था। 1 जुलाई 2026 तक सरकार के कार्यकाल को करीब 51 महीने हो चुके हैं, जिसके हिसाब से हर पात्र महिला का कुल 51,000 रुपये बकाया बनता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अब अचानक सरकार सिर्फ 3,000 रुपये थमा रही है, तो बाकी के 48,000 रुपये कहां गए। दत्ता ने मांग की है कि अगर सरकार की नीयत वास्तव में साफ है, तो वह हर लाभार्थी महिला को उसका पूरा 51,000 रुपये का बकाया तुरंत चुकाए, अन्यथा यह सीधे तौर पर राज्य की हर महिला से 48,000 रुपये की लूट है।
चुनाव आते ही याद आया महिलाओं से किया वादा
इस योजना को अचानक लागू किए जाने की टाइमिंग पर भी यूथ कांग्रेस नेता ने कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इसे अरविंद केजरीवाल के उस हालिया बयान से जोड़ा है, जिसमें पंजाब विधानसभा चुनाव नवंबर 2026 में होने के संकेत दिए गए थे। दत्ता ने कहा कि चुनाव से ठीक कुछ महीने पहले इस वादे को याद करना सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाता है। यह वोट हासिल करने के लिए पंजाब की महिलाओं को दोबारा मूर्ख बनाने की एक हताश कोशिश है। उन्होंने सरकार से गारंटी मांगी कि जनता को पता होना चाहिए कि यह भुगतान एक दीर्घकालिक प्रतिबद्धता है या चुनाव खत्म होने के बाद इसे अचानक बंद कर दिया जाएगा।
राज्य की आर्थिक स्थिति और कर्ज पर जताई चिंता
महिलाओं के बकाये के साथ-साथ अंगद दत्ता ने पंजाब की खराब वित्तीय स्थिति पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब राज्य पहले ही भारी आर्थिक संकट और तनाव से गुजर रहा है, तो इतने बड़े खर्च को कैसे पूरा किया जाएगा। दत्ता ने सरकार से एक पारदर्शी वित्तीय रोडमैप जनता के सामने रखने की मांग करते हुए कहा कि नागरिकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि इस योजना का पैसा कहां से आएगा। उन्होंने चिंता जताई कि कहीं यह कदम भविष्य की पीढ़ियों पर कर्ज का बोझ तो नहीं बढ़ा देगा। दत्ता ने अंत में स्पष्ट किया कि चुनावी वादे सत्ता में आने के पहले दिन से पूरे होने चाहिए, न कि चुनाव नजदीक आने पर टुकड़ों में।