भारत इंफो : पंजाब में गहराते बिजली संकट ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसी के विरोध में आज ‘किसान मजदूर संघर्ष समिति’ ने सूबे भर में बड़े पैमाने पर रोष प्रदर्शन किए। संगठन के आह्वान पर राज्य के 17 जिलों में 31 अलग-अलग स्थानों पर पावरकॉम के मुख्य दफ्तरों, एक्सियन (XEN) और एसडीओ (SDO) कार्यालयों के बाहर धरना दिया गया। प्रदर्शनकारी किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बिजली आपूर्ति की बदतर स्थिति पर अपना गुस्सा जाहिर किया।
सरकारी दावों की खुली पोल, 3 घंटे आ रही बिजली
किसान नेताओं ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि धान की रोपाई के सीजन से पहले बिजली आपूर्ति को लेकर किए गए तमाम दावे खोखले साबित हुए हैं। सरकार ने किसानों को रोजाना 8 घंटे निर्बाध बिजली देने का वादा किया था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश इलाकों में किसानों को केवल 3 से 5 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
बिजली सुधारों की मांग और निजीकरण का विरोध
प्रदर्शन के दौरान किसान संगठनों ने सरकार के समक्ष अपनी मांगें पुरजोर तरीके से रखीं। नेताओं ने मांग की कि खेती की मोटरों के लिए रोजाना 16 घंटे और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 24 घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही, स्मार्ट और प्री-पेड मीटर लगाने की योजना को तुरंत प्रभाव से रद्द करने, पावरकॉम में रिक्त पड़े पदों को भरने और खराब पड़े ट्रांसफार्मरों को प्राथमिकता के आधार पर बदलने की मांग की गई।
किसान नेताओं ने चेताया कि सरकार बिजली बोर्ड को धीरे-धीरे निजीकरण की ओर धकेल रही है, जिससे किसान और आम जनता दोनों के हितों को नुकसान होगा। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने बिजली संकट का समाधान नहीं किया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।