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भारत का दुश्मन और आतंकी मास्टरमाइंड आमिर हमजा अस्पताल में भर्ती, ‘अनजान’ हमलावरों ने किया हमला

भारत इंफो : पाकिस्तान के लाहौर शहर में एक बड़ी वारदात सामने आई है, जहां प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैबा के सह-संस्थापक और बेहद खतरनाक आतंकवादी आमिर हमजा पर जानलेवा हमला हुआ है। जानकारी के मुताबिक, हमजा जब लाहौर में एक स्थानीय समाचार चैनल के कार्यालय के बाहर मौजूद था, तभी मोटरसाइकिल सवार अज्ञात हमलावरों ने उस पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। इस हमले में हमजा को कई गोलियां लगी हैं, जिसके बाद उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत फिलहाल बेहद नाजुक बनी हुई है और वह वेंटिलेटर पर है।

हाफिज सईद का करीबी और लश्कर का वैचारिक चेहरा
आमिर हमजा केवल एक लड़ाका ही नहीं, बल्कि लश्कर-ए-तैबा की विचारधारा को गढ़ने वाला मुख्य चेहरा रहा है। उसने लश्कर प्रमुख हाफिज सईद के साथ मिलकर इस आतंकी संगठन की नींव रखी थी और लंबे समय तक सईद के सबसे भरोसेमंद सलाहकार यानी ‘राईट हैंड’ के रूप में काम किया।

वह अफगान मुजाहिदीन का एक अनुभवी सदस्य रहा है और भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले अपने भाषणों के लिए कुख्यात है। हमजा लश्कर के आधिकारिक प्रकाशनों का संपादक भी रह चुका है और उसने ‘काफिला दावत और शहादत’ जैसी किताबें लिखकर युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने में बड़ी भूमिका निभाई है।

वैश्विक प्रतिबंध और आतंकी गतिविधियों में भूमिका
आमिर हमजा की खतरनाक गतिविधियों को देखते हुए अमेरिकी वित्त विभाग ने उसे बहुत पहले ही प्रतिबंधित आतंकवादियों की सूची में डाल दिया था। लश्कर की केंद्रीय समिति के सदस्य के तौर पर वह न केवल संगठन के लिए धन जुटाने का काम करता था, बल्कि नए आतंकियों की भर्ती और जेलों में बंद आतंकवादियों को छुड़ाने के लिए बातचीत करने की जिम्मेदारी भी उसी के कंधों पर थी। भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों की साजिशों के पीछे भी उसका नाम प्रमुखता से जुड़ता रहा है, जिसके कारण वह सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हमेशा बना रहा।

लश्कर से अलगाव और नए गुट ‘जैश-ए-मनकाफा’ का गठन
साल 2018 में जब पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते लश्कर से जुड़ी संस्थाओं जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत पर नकेल कसी, तो आमिर हमजा ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत लश्कर से अलग होने का दिखावा किया। इसके तुरंत बाद उसने ‘जैश-ए-मनकाफा’ नामक एक नए आतंकी गुट का गठन कर लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए समूह का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में आतंकी हमलों को जारी रखना था ताकि मुख्य संगठन पर लगे प्रतिबंधों से बचा जा सके। अब लाहौर में उस पर हुए इस हमले ने पाकिस्तान में छिपे आतंकियों के बीच खौफ का माहौल पैदा कर दिया है।

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