2027 के चुनाव से पहले अकाली राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना
बोलीं- पंजाब और सिख समुदाय के हितों की रक्षा हो तो भाजपा से गठबंधन पर विचार संभव
सुखबीर बादल के साथ चलने के लिए भी तैयार, लेकिन अकाल तख्त के आदेशों का पालन जरूरी
मनुपाल शर्मा, चंडीगढ़
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अकाली राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत मिलने लगे हैं। शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) की वरिष्ठ नेता और पूर्व एसजीपीसी अध्यक्ष बीबी जागीर कौर के ताजा राजनीतिक रुख ने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। उन्होंने जहां अकाली-भाजपा गठबंधन की संभावनाओं का समर्थन किया है, वहीं सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल के साथ फिर से चलने की इच्छा भी जताई है। हालांकि, इसके लिए उन्होंने पंथक मुद्दों और श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों के पालन की शर्त रखी है। बीबी जागीर कौर ने स्पष्ट किया है कि यदि केंद्र सरकार और भाजपा पंजाब तथा सिख समुदाय के हितों की रक्षा सुनिश्चित करती है तो भाजपा के साथ गठबंधन करने पर विचार किया जा सकता है। उनका कहना है कि उनके लिए पंजाब और सिख समुदाय के हित राजनीति से ऊपर हैं। उन्होंने चुनावी गठबंधन के लिए पंथक सोच रखने वाली राजनीतिक पार्टियों के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखने की बात भी कही है।
सुखबीर बादल के साथ आने के लिए भी तैयार
सुखबीर सिंह बादल के साथ दोबारा राजनीतिक रूप से जुड़ने के सवाल पर बीबी जागीर कौर ने कहा था कि यदि सुखबीर बादल 2 दिसंबर 2024 को श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से जारी आदेश को पूरी तरह स्वीकार करते हैं और उस पर अमल करते हैं तो उनके साथ चलने में कोई एतराज नहीं है। उनका यह बयान अकाली दल के अलग-अलग गुटों के बीच एकता की संभावनाओं को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने सिख राजनीति में एकता की जरूरत पर भी जोर दिया है।
अकाली दल (पुनर सुरजीत) भी गठबंधन की चर्चाओं में शामिल
इस बीच मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के कुछ वरिष्ठ नेताओं को भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के संभावित चुनावी गठबंधन के दायरे में लाने पर भी बातचीत चल रही है। इनमें बीबी जागीर कौर के अलावा प्रेम सिंह चंदूमाजरा, गुरप्रताप सिंह वडाला और गोबिंद सिंह लोंगोवाल जैसे नेताओं के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। यदि ऐसा कोई राजनीतिक समझौता होता है तो अकाली दल के अलग-अलग गुटों के नेताओं को एक बड़े चुनावी मंच पर लाने की संभावना बन सकती है।
2020 में टूटा था अकाली-भाजपा गठबंधन
गौरतलब है कि अकाली दल और भाजपा का गठबंधन 1996 में हुआ था। दोनों दलों ने 1997, 2007 और 2012 में पंजाब में गठबंधन सरकारें बनाई थीं। सितंबर 2020 में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने भाजपा से अपना 24 साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया था। इसके बाद दोनों पार्टियों ने 2022 के विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़े। अब 2027 के चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं फिर तेज हैं। अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल भी कह चुके हैं कि उनकी विचारधारा से सहमत दलों के साथ गठबंधन के विकल्प खुले हैं।
क्या फिर एकजुट होगी अकाली राजनीति?
बीबी जागीर कौर के बयान को केवल भाजपा के साथ गठबंधन के समर्थन के रूप में नहीं, बल्कि अकाली राजनीति में संभावित पुनर्गठन के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। यदि बादल नेतृत्व और अकाली दल (पुनर सुरजीत) के नेताओं के बीच सहमति बनती है तो पंजाब की राजनीति में नया अध्याय शुरू हो सकता है।हालांकि, बीबी जागीर कौर की शिरोमणि अकाली दल (बादल) में औपचारिक वापसी को लेकर अभी कोई घोषणा नहीं हुई है। फिलहाल उनके बयानों और विभिन्न अकाली गुटों के बीच चल रही राजनीतिक चर्चाओं ने 2027 के चुनाव से पहले अकाली राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।