मनुपाल शर्मा, जालंधर
पंजाब प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के बाद अब संगठन के भीतर एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पंजाब प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष परगट सिंह और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच मुलाकात हुई है। दोनों नेताओं की इस मुलाकात को पंजाब कांग्रेस की मौजूदा परिस्थितियों और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
कांग्रेस हाईकमान ने 2 अक्टूबर 2026 को अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद जालंधर कैंट से विधायक और पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया था। वड़िंग अप्रैल 2022 से प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाल रहे थे।
परगट सिंह की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पिछले कई महीनों से पंजाब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद और खींचतान सार्वजनिक चर्चा का विषय बने हुए थे। पार्टी के भीतर एक वर्ग की ओर से राजा वड़िंग के नेतृत्व में बदलाव की मांग उठती रही थी। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समेत कई नेताओं द्वारा संगठनात्मक बदलाव की जरूरत पर आवाज उठाए जाने की खबरें भी सामने आती रही हैं।
ऐसे राजनीतिक माहौल के बीच अब परगट सिंह और राजा वड़िंग की मुलाकात को पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, मुलाकात में क्या बातचीत हुई और दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इसके राजनीतिक संदेश को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय इसे कांग्रेस के भीतर संवाद और संगठनात्मक समन्वय के एक महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा सकता है।
दिलचस्प बात यह भी है कि प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद परगट सिंह ने सार्वजनिक रूप से संगठन को एकजुट रखने और सभी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की बात कही है। उन्होंने पार्टी में मतभेदों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए संगठन की एकजुटता पर जोर दिया है।
राजा वड़िंग ने भी परगट सिंह की नियुक्ति के बाद उन्हें सार्वजनिक रूप से बधाई दी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाए जाने पर शुभकामनाएं देते हुए उनके लिए सफलता की कामना की थी।
अब दोनों नेताओं की आमने-सामने हुई मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि कांग्रेस के सामने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को सक्रिय करने और अलग-अलग धड़ों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की चुनौती है। नेतृत्व परिवर्तन के बाद पार्टी के भीतर पुराने मतभेदों को किस तरह पीछे छोड़कर आगे बढ़ा जाता है, यह आने वाले दिनों में पंजाब कांग्रेस की राजनीति का अहम पहलू रहेगा।