Wednesday, October 14, 2026
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दूध में पानी या पानी में दूध? जालंधर में स्टिंग वीडियो ने खड़े किए बड़े सवाल

भारत इंफो : जिस दूध को लोग सेहत के लिए फायदेमंद मानकर खरीदते हैं, उसकी गुणवत्ता को लेकर जालंधर में सवाल खड़े हो गए हैं। देव डायरी के मनप्रीत मंगू की ओर से किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन में दूध में पानी मिलाकर बेचने का दावा सामने आया है। स्टिंग के दौरान एक दूध विक्रेता से पूछताछ की गई, जिसमें उसने कथित तौर पर दूध में पानी मिलाने की बात कही।

वीडियो में दूध की कीमत और उसकी बिक्री को लेकर विक्रेता से सवाल किए जाते हैं। इसी दौरान दूध में मिलावट से जुड़ी जानकारी सामने आने का दावा किया गया है।

75 रुपए का दूध 70 रुपए में कैसे बिक रहा?
स्टिंग के दौरान दूध विक्रेता से पूछा गया कि जब वह डेयरी से दूध करीब 75 रुपए प्रति लीटर में लेता है तो उसे करीब 70 रुपए में कैसे बेच रहा है। इस पर विक्रेता ने कथित तौर पर कहा कि बाजार में दूध 65 से 70 रुपए के आसपास बिक रहा है। इसके बाद उससे दूध में किसी तरह के केमिकल के इस्तेमाल को लेकर सवाल किया गया। वीडियो में विक्रेता कथित तौर पर किसी केमिकल का इस्तेमाल करने से इनकार करता नजर आता है।

28 किलो दूध में 12 किलो पानी मिलाने का दावा
स्टिंग में विक्रेता ने कथित तौर पर बताया कि वह दूध के एक कैन में करीब 12 किलो पानी मिलाता है। उसके मुताबिक, करीब 28 किलो भैंस के दूध में 12 किलो पानी मिलाकर उसे बेचा जाता है। विक्रेता के कथित बयान के अनुसार, इस तरह दूध की मात्रा बढ़ जाती है और उसे करीब 15 से 16 हजार रुपए तक की बचत होती है।

काम बंद करने को कहा, मालिक ने जारी रखने की बात कही
वीडियो में विक्रेता ने कथित तौर पर यह भी कहा कि उसने यह काम बंद करने के लिए कहा था, लेकिन मालिक की ओर से उसे काम जारी रखने के लिए कहा गया। इसके बाद वह दूध में पानी मिलाकर बिक्री करता रहा। हालांकि, स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दूध की वास्तविक गुणवत्ता और उसमें मिलावट की स्थिति की पुष्टि केवल अधिकृत खाद्य सुरक्षा जांच या लैब टेस्ट के जरिए ही की जा सकती है।

दूध की शुद्धता पर उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद दूध की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अगर वीडियो में किए गए दावे जांच में सही पाए जाते हैं तो यह उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है। संबंधित विभाग की ओर से जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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