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वज्र कोर को मिला नया नेतृत्व, ले. जनरल कबथियाल ने संभाली कमान

भारत इंफो : “हर काम देश के नाम” के संकल्प के साथ लेफ्टिनेंट जनरल अमित कबथियाल ने बुधवार को प्रतिष्ठित वज्र कोर की कमान संभाल ली। उन्होंने यह जिम्मेदारी लेफ्टिनेंट जनरल अजय चांदपुरिया से ली, जिन्होंने जुलाई 2024 से इस कोर का नेतृत्व किया था। वज्र कोर को ‘पंजाब के रक्षक’ के रूप में जाना जाता है।

शहीदों को दी श्रद्धांजलि, जवानों को संदेश
कमान संभालने के बाद नए कोर कमांडर ने वज्र शौर्य स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को नमन किया। इस दौरान उन्होंने सभी रैंकों के सैनिकों से ऑपरेशनल तत्परता के उच्च मानकों को बनाए रखने, बदलती चुनौतियों के अनुसार खुद को ढालने और भारतीय सेना के मूल्यों को कायम रखने का आह्वान किया।

तीन दशकों का समृद्ध सैन्य अनुभव
देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकैडमी के पूर्व छात्र लेफ्टिनेंट जनरल अमित कबथियाल गढ़वाल राइफल्स के दूसरी पीढ़ी के अधिकारी हैं। उनके पास 30 वर्षों से अधिक का व्यापक सैन्य अनुभव है। उन्होंने उत्तरी सीमाओं, नियंत्रण रेखा (LoC) और उग्रवाद-रोधी अभियानों सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में सेवाएं दी हैं। वे ऑपरेशन रक्षक, राइनो, विजय और पराक्रम जैसे अहम अभियानों का हिस्सा भी रहे हैं।

कमांड और अंतरराष्ट्रीय अनुभव
अपने करियर में उन्होंने स्काउट्स बटालियन, माउंटेन डिवीजन और असम राइफल्स के सेक्टर की कमान संभाली है। मणिपुर और पूर्वी सिक्किम जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में उनकी तैनाती रही। इसके अलावा उन्होंने लाओ PDR में भारतीय सेना प्रशिक्षण टीम के साथ कार्य करते हुए अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग में भी योगदान दिया।

सम्मान और शैक्षणिक उपलब्धियां
लेफ्टिनेंट जनरल कबथियाल को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए युद्ध सेवा पदक, सेना पदक (वीरता) और सेना पदक पर ‘बार’ से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने University of Delhi से स्नातक, University of Madras से स्ट्रेटेजिक स्टडीज में मास्टर्स और M.Phil, तथा Osmania University से मैनेजमेंट स्टडीज में मास्टर्स किया है।

अजय चांदपुरिया का कार्यकाल और नई जिम्मेदारी
लेफ्टिनेंट जनरल अजय चांदपुरिया के नेतृत्व में वज्र कोर ने ऑपरेशनल तैयारियों, तकनीकी एकीकरण और संगठनात्मक सुधारों में महत्वपूर्ण प्रगति की। उनके कार्यकाल में भैरव बटालियन और अश्विनी प्लाटून का गठन, निगरानी तंत्र में सुधार और नागरिक-सैन्य तालमेल को मजबूत किया गया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन राहत के दौरान प्रभावी नेतृत्व दिखाया। अब वे महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में कमांडेंट का पदभार संभालेंगे, जहां वे भविष्य के सैन्य नेतृत्व को दिशा देंगे।

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