भारत इंफो : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य तल्खी के बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। ट्रम्प ने दावा किया है कि उन्हें ईरान का सुप्रीम लीडर बनने का प्रस्ताव मिला था, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया।
हालांकि, ईरान की सरकार ने इस दावे को पूरी तरह काल्पनिक बताते हुए खारिज कर दिया है और स्पष्ट किया है कि ऐसी कोई भी पेशकश या बातचीत कभी नहीं हुई। इस जुबानी जंग के साथ ही ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने अमेरिका और इजरायल को कड़ी चेतावनी जारी की है कि यदि उनके खिलाफ कोई जमीनी कार्रवाई की गई, तो इसके परिणाम विनाशकारी होंगे।
भारत के लिए बड़ी राहत और होर्मुज का फैसला
युद्ध के बढ़ते खतरों के बीच भारत और उसके मित्र देशों के लिए एक सुखद खबर सामने आई है। ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को गुजरने की अनुमति दे दी है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों से होने वाले तेल आयात पर काफी निर्भर है, ऐसे में इस मार्ग के खुले रहने से तेल की कीमतों और शिपिंग लागत में स्थिरता बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह फैसला उसके मित्र देशों के साथ आर्थिक संबंधों को सुरक्षित रखने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
कूटनीति की पहल और जमीन पर तनावपूर्ण हालात
तनाव को कम करने के लिए अमेरिका ने ईरान के सामने 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव रखा है, जिसमें न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक और मिसाइल नियंत्रण जैसी कड़ी शर्तें शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस संवेदनशील बातचीत में पाकिस्तान एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
दूसरी ओर, जमीनी हकीकत अब भी चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि इस्फहान और शिराज जैसे इलाकों में धमाकों और हमलों की खबरें लगातार मिल रही हैं। इस बीच चीन ने भी शांति की अपील करते हुए कहा है कि केवल सीधी बातचीत के जरिए ही क्षेत्र में स्थिरता लाई जा सकती है, अन्यथा ड्रोन और मिसाइल हमलों का यह सिलसिला पूरे वैश्विक बाजार को प्रभावित कर सकता है।