भारत इंफो : बिहार की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को पटना पुलिस ने एक पुराने आपराधिक मामले में गिरफ्तार कर लिया। पटना के मंदिरी स्थित उनके आवास पर पुलिस की टीम भारी दलबल के साथ पहुंची और कई घंटों की लंबी जद्दोजहद के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। इस गिरफ्तारी के बाद से ही बिहार का सियासी पारा चढ़ा हुआ है, क्योंकि सांसद ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कुर्की के आदेश के बाद एक्शन में आई पुलिस
पप्पू यादव की यह गिरफ्तारी किसी नए मामले में नहीं, बल्कि एक पुराने लंबित केस के कारण हुई है। बताया जा रहा है कि संबंधित मामले में अदालत में लगातार गैरहाजिर रहने के कारण उनके खिलाफ पहले गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। जब इसके बावजूद वे पेश नहीं हुए, तो अदालत ने उनके आवास पर इश्तेहार चस्पा करने का आदेश दिया। कानूनी प्रक्रिया के अंतिम चरण में कोर्ट ने उनकी संपत्ति कुर्क करने का सख्त आदेश जारी कर दिया, जिसके तुरंत बाद पटना पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए उन्हें उनके घर से उठा लिया।
अस्पताल में स्ट्रेचर पर बीते घंटे, सांसद की बिगड़ी तबीयत
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव को प्रोटोकॉल के तहत मेडिकल जांच के लिए सबसे पहले IGIMS अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल परिसर से आई तस्वीरों और खबरों ने विवाद खड़ा कर दिया, क्योंकि सांसद को लंबे समय तक स्ट्रेचर पर ही लेटा कर रखा गया और उन्हें बेड तक उपलब्ध नहीं कराया गया। उनके समर्थकों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए। स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए और गहन जांच के लिए बाद में उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) रेफर कर दिया गया।
सांसद ने लगाया पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप
अपनी गिरफ्तारी के दौरान पप्पू यादव ने पुलिस प्रशासन पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की टीम सिविल ड्रेस में उनके घर पहुंची थी, जिससे उन्हें लगा कि कोई अपराधी उनके घर में घुस आया है। सांसद ने आशंका जताई कि पुलिस उन्हें शारीरिक नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे पुलिस स्टेशन जाने के बजाय सीधे अदालत में पेश होना चाहते थे। पप्पू यादव ने पूरी कार्रवाई को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताते हुए कहा कि उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।