भारत इंफो : बठिंडा में ‘पक्का मोर्चा’ लगाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे किसानों और प्रशासन के बीच बरनाला में भीषण टकराव की स्थिति पैदा हो गई। पुलिस ने जब किसानों के काफिले को रोकने का प्रयास किया, तो दोनों पक्षों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली।
स्थिति को कंट्रोल में करने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज का सहारा लिया, जिसके बाद मौके पर भारी हंगामा और अफरा-तफरी मच गई। किसानों का आरोप है कि उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है, जबकि पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए कड़ाई बरत रहा है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है।
तड़के सुबह किसान नेताओं की नजरबंदी से भड़का गुस्सा
पुलिस ने किसानों के इस आंदोलन को विफल करने के लिए रणनीति के तहत कार्रवाई करते हुए सुबह करीब चार बजे ही प्रमुख किसान नेताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया। बीकेयू उगराहां के नेता बिट्टू मल्लन और गुरुसर इकाई के महासचिव जसविंदर सिंह धालीवाल को हिरासत जैसी स्थिति में रखे जाने पर किसान जत्थेबंदियों ने कड़ी नाराजगी जताई है।
नजरबंद नेताओं का कहना है कि सरकार दमनकारी नीतियों के जरिए उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की कार्रवाइयों से उनका हौसला टूटने वाला नहीं है और वे लोकतांत्रिक तरीके से अपने हक की लड़ाई को अंतिम अंजाम तक पहुंचाएंगे।
साथियों की रिहाई और ‘झूठे मुकदमों’ के खिलाफ आर-पार का संघर्ष
किसानों के इस ताजा आक्रोश की मुख्य वजह उनके दो साथियों, बलदेव सिंह चाऊके और सगनदीप सिंह जिउंद की रिहाई की मांग है। किसान नेताओं के अनुसार, ये दोनों पिछले नौ महीनों से बठिंडा जेल में बंद हैं और उन पर पुलिस द्वारा झूठे मुकदमे थोपे गए हैं।
यूनियन ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि उनका यह संघर्ष तब तक थमेगा नहीं, जब तक कि उनके नेताओं को ससम्मान रिहा नहीं कर दिया जाता। पुलिसिया कार्रवाई के बावजूद किसान संगठन अपनी मांगों पर डटे हुए हैं और आने वाले दिनों में यह विरोध प्रदर्शन और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।